सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा/राजिम,
(रायपुर), छ.ग.
(नया अध्याय, देहरादून)
“शिक्षा, संस्कार व नवनिर्माण” (कविता)
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वर्णों के योग से बना, शब्दों का बेजोड़ संसार,
व्याकरणिक ज्ञान सँवारे, सहज-मधुर उच्चार।
सौम्य अभिव्यक्ति से ही, झलकता शिष्टाचार,
सुसंस्कृत व्यवहार ही, व्यक्तित्व का आधार।
आवश्यकता ही जननी है, रचती नूतन आविष्कार,
छंद, दोहा, अलंकारों से, सजे काव्य-संसार।
शिक्षक के ज्ञान दीप से, मिटता अज्ञान अंधकार,
नवाचार की दिशा से, शिक्षा को मिला विस्तार।
उच्च भाव, सद्-संस्कार से, होता सबका उद्धार,
गुरु-शिष्य के मधुर संबंध, रचें नया व्यवहार।
युवा हुंकार से गूँजे, नवनिर्माण की जयकार,
पढ़कर-लिखकर आगे बढ़े, महान् हिंदुस्तान-विचार।।







