स्यासू गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित।  ग्रामीणों का जीवन बना कठिन। 

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सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी

 

                     (नया अध्याय)

 

 

      स्यासू गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित।

           

 

       ग्रामीणों का जीवन बना कठिन। 

 

 

          ऊखीमठ: कालीमठ घाटी के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्यासू आजादी के सात दशकों बाद भी सड़क और यातायात व्यवस्था से नहीं जुड़ पाई है। आधुनिक विकास की दौड़ में जहां अधिकांश गांव सड़क संपर्क से जुड़ चुके हैं, वहीं स्यासू के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सड़क के अभाव में यहां के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान पीठ पर ढोकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क न पहुंचने से सबसे अधिक परेशानी बीमार, बुजुर्गों और महिलाओं को झेलनी पड़ती है। आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई बार समय पर उपचार न मिलने के कारण गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। स्यासू गांव के पूर्व प्रधान राकेश रावत बताते हैं कि खाद्यान्न, गैस सिलेंडर, निर्माण सामग्री सहित दैनिक उपयोग की सभी वस्तुएं उन्हें खुद ही ढोकर लानी पड़ती हैं। इससे न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

 

कहा कि ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग उठाई, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचकर सड़क बनाने के वादे जरूर करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही ये वादे भी ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। ग्रामीण पंकज सिंह रावत का कहना है कि यदि जल्द ही स्यासू गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया, तो गांव से पलायन और बढ़ सकता है। शिव सिंह रावत , प्रताप सिंह रावत का कहना है कि रोजगार और सुविधाओं के अभाव में उन्हें मजबूरी में शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है।

 

ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि स्यासू गांव को प्राथमिकता के आधार पर सड़क सुविधा से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें भी विकास की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर मिल सके। ग्रामीणो ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन – प्रशासन की होगी।

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