अनामिका अर्श
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
‘लगन’
लगी तुमसे जबसे लगन….
शिव तेरी यादों में हूं मैं मगन….
लगी तुमसे जबसे लगन….।
तेरी कृपा की मुझ पर यूं बरसात हुई….
जैसे जलते रेगिस्तान में टूट कर बरसा हो सावन…
लगी तुमसे जबसे लगन…।
शब्दों में सामर्थ्य नहीं जो करें तेरा शुक्रिया….
मेरे मौन नयनों के नीर से कर लेना पिया तुम आचमन…
लगी तुमसे जबसे लगन….।
संसार में रह कर हुई संसार से विमुख
महायोगी तेरे इश्क़ ने बना दिया मुझे भी जोगन
लगी तुमसे जबसे लगन….।







