चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग पर खर्च हुए एक करोड़ रुपये की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुँची। 

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सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी

 

 

               (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

 

चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग पर खर्च हुए एक करोड़ रुपये की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुँची। 

 

             निष्पक्ष जांच की मांग।

       लोक निर्माण विभाग में मचा हड़कंप ।।

कालीमठ घाटी के लोगों ने आंदोलन की चेतावनी। 

 

उखीमठः  चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग के रखरखाव एवं मरम्मत कार्यों पर लगभग एक करोड़ रुपये व्यय किए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग में हलचल तेज हो गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मार्ग पर किए गए कार्य धरातल पर निर्धारित मानकों के अनुरूप दिखाई नहीं देते, जबकि विभागीय अभिलेखों में बड़ी धनराशि व्यय दर्शाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग कालीमठ घाटी के अनेक ग्रामीणों के साथ-साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद मार्ग के कई हिस्सों में क्षतिग्रस्त सीढ़ियां, उखड़ा हुआ मार्ग, टूटी सुरक्षा दीवारें तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था का अभाव आज भी बना हुआ है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाता है, जिससे आवागमन करने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतकर्ता ओ पी भट्ट का आरोप है कि जिस स्तर का कार्य कागजों में दर्शाया गया है, उसकी वास्तविक स्थिति स्थल पर देखने को नहीं मिलती। उनका कहना है कि यदि विभाग ने वास्तव में लगभग एक करोड़ रुपये व्यय किए हैं तो उसका प्रभाव पैदल मार्ग की गुणवत्ता और सुविधाओं में स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत में पूरे प्रकरण की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर मामला दर्ज होने के बाद लोक निर्माण विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। विभागीय स्तर पर शिकायत से जुड़े अभिलेखों को एकत्रित किए जाने तथा कार्यों का विवरण तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

इधर कालीमठ घाटी के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं कराई गई तथा शिकायत को दबाने का प्रयास किया गया तो घाटी का जनमानस व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है तथा सार्वजनिक धन के उपयोग का पूरा हिसाब जनता को मिलना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता श्रेष्ठ प्रकाश भट्ट ने मांग की है कि स्वतंत्र तकनीकी टीम से पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, निर्माण एवं रखरखाव कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में विकास कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। उनका मानना है कि चौमासी–खाम–रैकाधार पैदल मार्ग केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि क्षेत्र के धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन महत्व से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इसके रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद शासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और जांच किस निष्कर्ष तक पहुँचती है। कालीमठ घाटी से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद विभागीय ठेकेदार एक दिन कुछ मजदूरों लेकर चौमासी से आगे तो पहुंचा मगर सांय ढलते की रफ्फूचक्कर हो गया। वहीं दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग के एई नरेन्द्र कुमार का कहना है कि किसी भी निर्माण कार्य की एक वर्ष की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है तथा पैदल के रखरखाव के लिए स्वीकृत धनराशि का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जायेगा।

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