ब्यूरो करीमनगर (तेलंगाना): (नया अध्याय)
स्वतंत्रता आंदोलन से डिजिटल युग तक हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका।
हिन्दी राष्ट्रीय एकता, भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भाषा :
– डॉ. यल. कोमुरा रेड्डी
करीमनगर स्थित शासकीय महिला डिग्री एवं पीजी महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में हिन्दी दिवस समारोह उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एस.आर.आर. शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. यल. कोमुरा रेड्डी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। समारोह में हिन्दी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आधुनिक महत्व पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. यल. कोमुरा रेड्डी ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दी ने जनजागरण, जनसंपर्क और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी ने जनसामान्य की भाषा में संवाद तथा भारतीय भाषाओं के महत्व पर बल दिया। दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा जैसी संस्थाओं के प्रयासों से हिन्दी का विस्तार हुआ।
उन्होंने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया जाना हिन्दी के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। इसी की स्मृति में प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषायी विविधता उसकी शक्ति है और हिन्दी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ होना चाहिए।
डॉ. रेड्डी ने कहा कि हिन्दी ने साहित्य, संगीत, सिनेमा, पत्रकारिता और जनसंचार के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में योगदान दिया है। भारतीय संस्कृति, परंपराओं, जीवन-मूल्यों और संस्कारों को अभिव्यक्त करने तथा नई पीढ़ी तक पहुँचाने में भी हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने हिन्दी की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित अनेक देशों में हिन्दी से जुड़े समुदाय और संस्थाएँ सक्रिय हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया तथा खाड़ी देशों में भी हिन्दी का अध्ययन और प्रयोग बढ़ रहा है।
डिजिटल युग को हिन्दी के लिए नए अवसरों का युग बताते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हिन्दी का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में हिन्दी का ज्ञान शिक्षा, अध्यापन, पत्रकारिता, अनुवाद, डिजिटल कंटेंट, पर्यटन तथा तकनीकी क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी के साथ डिजिटल कौशल विकसित करने का आह्वान किया।
महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. जी. श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि हिन्दी आज साहित्य और शिक्षा के साथ-साथ मीडिया, प्रशासन, डिजिटल तकनीक और रोजगार के अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी के अध्ययन के साथ उसके व्यावहारिक प्रयोग पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. जी. अनंतलक्ष्मी ने कहा कि हिन्दी को केवल पाठ्यक्रम के विषय के रूप में न देखकर ज्ञान, विचार और अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में अपनाना चाहिए। उन्होंने डिजिटल युग में हिन्दी के बढ़ते अवसरों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध हिन्दी पत्रकार श्री सैयद इमामुद्दीन भी उपस्थित रहे और उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता से संबंधित अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. यल. कोमुरा रेड्डी ने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए इंचार्ज प्राचार्य डॉ. जी. श्रीनिवास रेड्डी, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. जी. अनंतलक्ष्मी तथा हिन्दी विभाग के अध्यापकगण के प्रति आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों ने हिन्दी के सम्मान, नियमित प्रयोग तथा प्रचार-प्रसार में योगदान देने का संकल्प लिया। समारोह में अध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।






