राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
खामोशी!
खामोशी में छुपा है कोई राज गहरा,
जवाब है ये सवालों का बेहद गहरा।
बिन बोले कह देती है दिल की कहानी,
लबों पर जब ठहर जाए सन्नाटा गहरा।
आँसुओं की भी है अपनी एक जुबान,
रोने में सुनाई देती है खामोशी गहरा।
इश्क में जो बातें रह जाएँ अधूरी,
वो खामोशी बन जाती है दर्द गहरा।
गुलशन में भी जब फूल चुप हो जाएँ,
तो हवाओं में गूँज उठे सन्नाटा गहरा।
नाम लेना भी मुश्किल हो जाए जब,
खामोशी ही हो जाती है नाम गहरा।








