ऊखीमठः हिमालय में सबसे ऊंचाई व चन्द्रशिला की तलहटी में विराजमान तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में पहली बार तीर्थ यात्रियों के आकड़े ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

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ब्यूरो रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी।

ऊखीमठः हिमालय में सबसे ऊंचाई व चन्द्रशिला की तलहटी में विराजमान तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में पहली बार तीर्थ यात्रियों के आकड़े ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। तुंगनाथ घाटी में लगातार हो रही झमाझम बारिश से भुजगली से चन्द्र शिला तक के भूभाग में फैले सुरम्य मखमली बुग्याल हरियाली से आच्छादित होने के कारण तुंगनाथ यात्रा पड़ावों की खूबसूरती बढ़ने लगी है। 31 जुलाई को केदारनाथ यात्रा के विभिन्न यात्रा पड़ावों पर आयी दैवीय आपदा के कारण तुंगनाथ धाम पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आई है मगर तुंगनाथ घाटी में मौसम खुलने के बाद सितम्बर माह के दूसरे सप्ताह से फिर तुंगनाथ धाम की यात्रा परवान चढ़ने के आसार बने हुए हैं। मन्दिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार तुंगनाथ धाम में अभी तक 94 हजार, 223 तीर्थ यात्रियों ने पूजा – अर्चना व जलाभिषेक कर विश्व समृद्धि की कामना की है! इस वर्ष तुंगनाथ धाम में भारी संख्या में तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों व सैलानियों की आवाजाही होने से तुंगनाथ घाटी के तीर्थाटन पर्यटन व्यवसाय में भारी इजाफा होने के साथ मन्दिर समिति की आय में भी वृद्धि हुई है! बता दे कि इस वर्ष विगत 10 मई को भगवान तुंगनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिये गये थे तथा कपाट खुलने के बाद ही प्रतिदिन हजारों तीर्थ यात्री तुंगनाथ धाम पहुंचने लगे थे । तुंगनाथ धाम के प्रबन्धक बलवीर नेगी ने बताया कि अभी तक तुंगनाथ धाम में 53 हजार 730 पुरूषों, 30 हजार 640 महिलाओं, 9 हजार 885 नौनिहालों , 810 साधु – सन्यासियो व 158 विदेशी सैलानियों ने तुंगनाथ धाम पहुंच कर पुण्य अर्जित किया! उन्होंने बताया कि इस वर्ष भगवान तुंगनाथ के कपाट खुलने के बाद से ही तीर्थ यात्रियों की आवाजाही मे भारी संख्या में शुरू हो गयी थी जो कि 30 जुलाई तक जारी रही मगर 31 जुलाई को केदारनाथ धाम की यात्रा प्रभावित होने के कारण तुंगनाथ धाम की यात्रा भी खासी प्रभावित हुई है। प्रबन्धक बलवीर नेगी ने बताया कि तुंगनाथ घाटी में धीरे – धीरे मौसम खुशनुमा होगा जा रहा है इसलिए सितम्बर माह के दूसरे सप्ताह से तुंगनाथ धाम की यात्रा दुबारा परवान चढ़ने के आसार बने हुए है। मन्दिर समिति के चन्द्रमोहन बजवाल ने बताया कि चोपता से सीधे चन्द्र शिला शिखर जाने वाले पर्यटकों व सैलानियों को मन्दिर समिति के रिकार्ड में दर्ज नही किया है क्योंकि अधिकांश सैलानी प्रकृति के आनन्द लेने के लिए चोपता से सीधे चन्द्रशिला शिखर पहुंचते है।

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