नवयुगा को मिली सफलता सिलक्यारा टनल का मलबा एक साइड से हटाया गया। वन वै से आवाजाही शुरू।

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 ब्यूरो उत्तरकाशीः सुरेश चंद रमोला।

नवयुगा को मिली सफलता सिलक्यारा टनल का मलबा एक साइड से हटाया गया। वन वै से आवाजाही शुरू।

               उत्तरकाशीः  विश्व चर्चित सिलक्यारा टनल के वारपार होने की खुशखबरी सामने आ रही है। पिछले साल 12 नवंबर को दीपावली की रात सिलक्यारा में निर्माणाधीन टनल में अचानक लैंड स्लाइडिंग हुई थी और दुर्भाग्य से सुंरग के अंदर 41 मजदूर फंस गये थे । लंबी जद्दोजेहद के बाद 17 वें दिन अंदर फंसे सभी मजदूरों को सकुशल सौलिड स्ट्रेटजी बनाकर पाइपों के रास्ते सकुशल बाहर निकाला गया था । टनल निर्माण में कार्य कर रही नवयुगा लिमिटेड कंपनी के लगातार प्रयास से अब 70 मीटर तक पड़े मलवे को वन वै बनाकर खाली किया जा चुका है और सुंरग के अंदर फंसी सभी बड़ी छोटी मसीनो गाड़ियों और अन्य कल-पुर्जों को ढूंढा जा रहा है। बताया गया कि 4 सितंबर को टनल एक साइड से वार पार हुई और कंपनी के अधिकारियों ने सुंरग के अंदर का जायजा लिया जो कार्य आज भी गतिमान है अब द्वीतीय चरण का मलबा हटाकर सुंरग का ट्रिटमेंट शुरू होगा। हांलांकि 17 दिन के लंबे अंतराल में 400 घंटों तक पिछले साल यहां आपरेशन जिंदगी रेस्क्यू चला था जो 28 नवंबर को सफल हुआ और विशेषज्ञों की मदद से 41 जिंदगियां सकुशल बाहर आ सकी थी ।

      जल्द हो जायेगी टनल वार पार।

जब सिलक्यारा टनल में यह घटनाक्रम हुआ तो उसके बाद लग रहा था कि अब यह टनल सफल नहीं होगी मगर कंपनी के वर्करों और अधिकारियों की सूझबूझ से अब लग रहा है कि जल्द ही टनल का कार्य पूरा जायेगा क्योंकि कि दूसरे छोड़ डंडालगांव की तरफ से सुंरग निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है और अब मात्र 150 से 200 मीटर का कार्य ही शेष रह गया है। हांलांकि सिलक्यारा साइड से भी कार्य में तेजी लाई जा रही है और एक्सपर्ट इंजीनियर इस कार्य में दिन रात लगे हैं।

      होटल व्यवसायियों का पैसा डूबा। 

जब सिलक्यारा टनल में मिशन जिंदगी आपरेशन चलाया जा रहा था तो उस दौरान बड़ी तादाद में मीडिया कर्मी और अधिकारियों को मैनेज करने के लिए जिला प्रशासन ने स्थानीय होटल व्यवसायियों के साथ उनके रहने व खाने की व्यवस्था की थी और यह भरोसा दिया था कि उनका बिल आपरेशन पूर्ण होने की तुरंत बाद दिलाया जाएगा। परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय व्यापारियों ने भी रात दिन उनकी मदद की और स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग किया मगर उसके बाद प्रशासन भूल गया कि स्थानीय व्यापारियों की देनदारी भी देनी है। आज स्थानीय व्यापारियों के लाखों का बिल बकाया है और स्थानीय होटल व्यवसायियों में भुगतान न होने को लेकर भारी आक्रोश है।

       बौखनाग का मंदिर भी तैयार हुआ।

चमत्कार को नमस्कार करते कंपनी के अधिकारियों ने आखिरकार यह मान लिया कि देवभूमि पर देवताओं की आज्ञा के बिना कोई भी कार्य सफल नहीं होता इस लिए अब बौखनाग देवता का मंदिर भी टनल के मुहाने पर लगभग तैयार है।

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