सुश्री सरोज कंसारी लेखिका एवं कवयित्री नवापारा राजिम, रायपुर (छ. ग)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
मुझसे क्या गलत हो गया?
(लघुकथा) –———————————

परिवार में चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी शिखा थी, घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। माँ जैसे-तैसे दूसरों के घर काम करके परिवार चला रही थी। पिता जी बहुत दिन से किसी बीमारी से ग्रसित थे, बिस्तर में पड़े रहते, चलने में असमर्थ थे। एक दिन उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई, पर हॉस्पिटल ले जाने के लिए रुपए नहीं थे, पड़ोस में एक युवक से वह सहायता के लिए कहीं, उसे हॉस्पिटल ले गए। सारा खर्च उस लड़के ने दिया। ऐसे ही दोनों रोज मिलते, बातें करते और एक दूसरे को पसंद करने लगे। लड़के ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा, शिखा ने मना करते हुए कहा घर की स्थिति ठीक नहीं, मेरे छोटे भाई-बहन की जिम्मेदारी है। उसने कहा विवाह के बाद वह उसके परिवार का भी ध्यान रखेगा।
घरवालों को बताया तो वे तैयार नहीं थे, पर बच्चों की खुशी के आगे मजबूर हो गए। दोनों का विवाह हुआ, आशीर्वाद देकर विदा किए। शिखा ने साल भर बाद एक बेटी को जन्म दिया। घर में सब अच्छा चल रहा था। एक दिन हितेश किसी काम से बाहर गया था, वहाँ होटल में रुका, गर्म तेल की कढ़ाही से टकरा गया, जिसमें उसका चेहरा जल गया। कुछ दिन इलाज के बाद घर आया। अब उसे घर से निकलने में संकोच हो रहा था, क्योंकि जलने के कारण उसका चेहरा भयानक लग रहा था। शिखा बहुत उदास थी। घर का खर्च चलाने के लिए वह काम पर जाने लगी। घर आने में कभी देर हो जाती, तो हितेश नाराज होता, उससे झगड़े करता। उस पर शक करने लगा। वह बहुत समझाती पर कोई फायदा नहीं हुआ।
एक दिन तंग आकर वह घर छोड़कर चली गई और कुछ दिन बाद दूसरे लड़के से शादी कर ली। समय बीतता गया, वह गम में शराब में डूब गया। छोटी बच्ची को उसकी दादी ने जैसे-तैसे पालन-पोषण किया, अब वह बड़ी हो गई थी। पिताजी की हालत देखकर उसे दुख होता। एक दिन दादी से उसने पूछा मेरे पिताजी मेरा ध्यान क्यों नहीं रखते और मेरी माँ कहाँ है? तब दादी ने बताया – दोनों के झगड़े में वह हमें छोड़कर चली गई। बेटी ने मासूमियत से पूछा – इसमें मेरी गलती क्या थी, अब मेरी जिम्मेदारी किसकी है? आप भी मुझे छोड़कर चली जाएंगी तो मैं अनाथ हो जाऊंगी, दादी आप हमेशा मेरे साथ रहना, इतना कहकर वह रो पड़ी दादी से लिपटकर। दादी उसके प्रश्नों के उत्तर न दे पाई, खामोश हो गई।






