सुश्री सरोज कंसारी
नवापारा राजिम, रायपुर (छ. ग.)
आलेख
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खुद से कहिए आप एक मजबूत इंसान हैं, कभी मजबूर नहीं हो सकतें।
छूट ही जाएंगा एक दिन देखते- देखते सब कुछ आज हैं वह नहीं रहेगा। हर दिन हम अपने जीवन का अनमोल क्षण खर्च करते हैं, यह जीवन हैं माटी का चोला। आज हैं कल का कोई भरोसा नहीं। अगले ही मोड में बहुत कुछ बदल जाता हैं बस हमें जीना हैं, ऐसे की कोई अफ़सोस न हो इस मनुज तन को हर पल उपयोगी बनाएं। मिल जाना हैं इस माटी में सदा के लिए फिर क्यूं हम समझ नही पाते ? और भागते- दौड़ते रहते हैं। कुछ तो नहीं अपना बस मेहमान हैं हम इसलिए नई सोच, उमंग के साथ एक नई शुरुवात करते रहिए जब तक सांसे हैं। इसे बर्बाद मत करिए, काम- क्रोध, भोग विलास में। फिर न मिलेंगे हम सभी जब बिछड़ जायेगे, न जानें कहां होंगे ? जब अवसर मिला हैं तो इसे भरपूर उपयोग किजिए और खुश रहने और दूसरो को खुशी देने में जुट जाइए।
जब भी हम किसी से मिले, पूरे दिल से मिले की याद रहें हर लम्हा! जिसे सोचकर जीने की चाहत बढ़ जाएं। इस धरती पर आए हैं तो कुछ अच्छा करके जाएं। अपनी जुबान से मीठी बातें करें जो लोगों के दिलों को छू जाएं । इस संसार की खूबसूरती को देखे, महसूस करें और प्रकृति का संरक्षण करें। यह धरती,चांद- सितारे, नदी- पहाड़ के प्रति आभार व्यक्त करें जो हमें अनुकूल वातावरण देते हैं। जो अच्छाई पास हैं वहीं लोगों को बांटे और जो बुराई हैं उसे धीरे-धीरे छोड़ने की कोशिश किजिए। किसी को चुभ जाएं, दुखी हो जाएं ऐसे बर्ताव मत किजिए। नेक कर्म करके उदास चेहरों में निराशा मन में उत्साह भर दिजिए।
इस सफर को यादगार बनाइए। कभी-कभी जीवन की राह में बहुत से ऐसे मोड़ आते हैं कि हम चिड़चिड़े हो जाते हैं।दिमाग काम नहीं करता बहुत विपरीत हालात से गुजरते हुए हमारी मानसिकता शून्य हो जाती हैं। लेकिन हमें कभी भी किसी मोड़ पर घबराना नहीं चाहिए अपना अच्छा स्वभाव बदलना नहीं चाहिए।जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जब दुखी हो कोई मुसीबत आ जाएं तो यह ना देखे की कोई आएंगे और आपकों संभाल लेंगे नई दिशा देंगे । बस खुद को हर हाल में प्रेरित करते रहिए और कहिए आप एक मजबूत इंसान हैं कभी मजबूर नहीं हो सकतें। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सामंजस्य बनाकर चलिए।
एक ही समस्या के कई हल और विकल्प होते हैं उसे ढूंढिए, धैर्य रखिए, उलझिए मत । पुण्य आत्मा बनिए गलत राह चलकर किसी का बुरा करके नुकसान, पहुंचाकर पाप के भागीदार मत बनिए। सबसे बड़ी शक्ति आपके पास हैं मनोबल उसे टूटने मत दिजिए। चाहें दुनिया कुछ भी कहें वही किजिए जो सही हैं, जिसमें सर्व कल्याण के भाव जुड़े हो। कभी घबराहट हो किसी बात से दर्द हो किसी के व्यवहार से उदासी हो असफलता से धोखा मिलें अपनो से मनमुटाव हो जाएं तो रोना नहीं बिखरना नहीं गलत फैसलें मत लेना। बस अपने अंतर्मन में जाना बातें करना और भूल जाना किसने कब, कैसे और क्या किया? बस याद रखना! उस विधाता के अनंत उपकार हैं हम पर, माता-पिता के कर्ज हैं, इस राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी हैं, समाज के हम हिस्सा हैं। उनके लिए ईमानदार रहकर हर उस कार्य को करना हैं जिससे भला हो सभी का।
उलझिए मत कहीं उत्साहित रहिए स्पष्टवादी बनिए। झूठी सांत्वना मत दिजिए अगर किसी से मन मिलता हैं, कोई आपके लिए वफादार हैं तो दिल की गहराइयों से निभाइए रिश्ते। चाहें रिश्ते कोई भी हो उनसे जुड़े ऐसे बंधन की हम एक दूसरे के प्रति कोई संदेह न रखें। उनके व्यक्तित्व के विकास, रूचि और मार्ग में बाधक न बनें, एहसास हो उनके लिए। स्वतंत्रता दिजिए उन्हें अपने अनुसार जीने के लिए। कोई घटना, होनी- अनहोनी, हादसे हो जाएं तो मन में डर आ ही जाता हैं कुछ समझ नहीं आता क्या करें ? उस समय व्याकुल होने की बजाएं शांत रहिए और तब सोचिए ! क्या कर सकतें हैं।
धैर्य जरुरी हैं भागने से कुछ नहीं होता, कोशिश करने से कोई उपाएं मिलते हैं। आप लीन रहिए अपने कार्य में और जब तक पूर्ण ना हो हार ना मानें। क्योंकि सफलता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है निरंतर प्रयास करते रहन। जब हम निरंतर अभ्यास करते हैं तो किसी भी काम में निखार रहता हैं और उसे हम आसानी से कर पाते हैं। भले ही लगता हैं कि हम जीवन को जी रहे हैं अभी उम्र बाकी हैं, लेकिन पता नहीं चलता और वक्त गुजर जाता हैं। अनंत इच्छाओं को पालकर हम भटकते हैं।
कभी-कभी अपने ख्वाहिश को पूर्ण करने के लिए बहुत ही संघर्ष का सामना करना पड़ता हैं। भविष्य के प्रति आशावादी रहिए और जिस काम से आनंद आता हैं उसे करते रहिए। हर समय सिर्फ लाभ मत देखिए, सुकुन से रह सकें वह कार्य भी किजिए इससे अतिरिक्त ऊर्जा मिलेगी। कब बुलावा आ जाएगा और सब कुछ छोड़कर जाना ही पड़ेगा हम नहीं जानते ? इसलिए जितने दिन भी रहें हर पल में जिंदगी हो ऐसी कोशिश होनी चाहिए। क्योंकि कुछ बातें हमारे वश में नहीं होती हमें झुकना ही पड़ता हैं। इसलिए ईर्ष्या -कपट, घमंड, प्रतिस्पर्धा सब कुछ छोड़कर सिर्फ अपने मन में सद्विचार भरना चाहिए और माफ कर देना चाहिए हर किसी को।माफ कर देने से दिल के रिश्ते मजबूत होते हैं और हमें अपने अपनो के साथ-साथ पराएं से भी अपनापन और स्नेह मिलता हैं।
जीवन में रखा क्या हैं ? ये सोचकर मन को मारकर, अपनी चाहत को दफन करके किसी से नाराज होकर मत बैठिए। हर हाल में जीने के लिए तैयार रहिए, गंभीर और गमगीन स्थिति से निकलिए। जो चाहते हैं उसके लिए शुरूवात कीजिए चाहे परिणाम जो भी आएं स्वीकार करने की आदत रखिए। तभी सहज रह पाएंगे इस प्रकार जिएं की दूसरों को तकलीफ ना हो और किसी के सहारा बन सकें तो यह हमारे लिए सौभाग्य की बात हैं। याद रखिए! तकलीफ सभी की एक सी होती हैं। इसलिए हर किसी की करुण कराह सुनिए किसी को उपेक्षित मत किजिए। छूट ही तो रहें हैं हर पल हमसे अपने से उम्र, रंग- रूप, यौवन फिर चिंता में हम क्यूं रहते हैं। बस इस के हो जाइए और मुस्कुराकर मिलिए इस जिंदगी से गम तो सभी को हैं किसी न किसी बात की छोड़िए घुटकर जीना बस खुलकर इस जीवन के। हर एक क्षण का आंनद लिजिए।
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