संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर, (मध्य प्रदेश)
ध्यान से कल्याण…!
नवरात्रि शक्ति-पूजा का हैं उत्सव,
इस पर्व को समझना हैं महोत्सव।
पहले-पहल शक्ति को हैं समझना,
शक्ति क्या? है, इसे जागृत करना।
इस तत्व को जीवन में आत्मसात,
यदि हम करें फिर बन जाए बात।
काल प्रवाह में बाह्य प्रतीक बचते,
उनके भीतर के मूल तत्व बिसरते।
मृत परंपराएं आजीवन ढोते रहते,
ये परंपराएं बुरी नहीं,आवश्यक हैं।
परंपरा शरीर में मूल-तत्व के प्राण,
जीवन ‘अमूल्य’ ध्यान से कल्याण।







