सुनील कुमार वर्मा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
अपने लिए
कर जरुर नेकी
जितनी बन सके।
पर हो तेरी नजरें
कुछ सपने लिए.
ख्याल रहे सपनों की
उस ढेरी में कुछेक सपने हों
तेरे अपने लिए.
सदा दूसरों को
राह देने के
परोपकार तुमने किए.
कभी तो कोई राह चुन लो
तुम भी अपने लिए.
दूसरों की खुशियों की खातिर
जाने कितने पल तुमने जिए,
कुछ पल चुरा सको तो
चुरा लो अपने लिए।
दूसरों को प्रकाशित करने
फूंक डाले अगिनत दिए,
क्यों बैठे हो अंधेरे में ?
इक्के, दुक्के दिए जला लो
अब तो तुम अपने लिए।







