सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
नवापारा-राजिम, (रायपुर, छ.ग.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“ढलती सांझ में आस का आकाश”
(कविता)
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ढलती हुई सांझ में,
सुख की गहराइ में।
उठते संभले मन,
उस उगते हुए सूरज की भांति है,
जो ज़िंदगी की कठिनाइयों से…
ये अहसास भी,
कि सुंदर ये ज़िंदगी भी
उस उगते हुई सूरज की भांति,
सुबह-सवेरे की बारिश…
किन्तु आती तो है,
किन्तु सन्ध्या की आस लेकर।
विलीन हो जाती है,
उस विशाल, गहरे, और
गम्भीर आकाश में।
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