कवयित्री चन्द्रमती चतुर्वेदी (चन्दू)
बस्ती, अयोध्या धाम
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
गुरु पूर्णिमा विशेष — दोहे
गुरु चरणों में शीश धर, करिए सच्चा मान।
गुरु कृपा से जगत में, मिलता ज्ञान महान॥
गुरु बिन जीवन क्या भला, जैसे दीपक बिन बाती।
गुरु ही राह दिखा सकें, जब राहें हों अँधियाती॥
अज्ञान तिमिर को हरें, गुरु ज्ञान की खान।
गुरु चरणों की धूल से, पावन हो इंसान॥
गुरु ने अक्षर ज्ञान दिया, दी जीवन की सीख। गुरु कृपा से राह में, मिलती मंजिल ठीक॥
गुरु माता और पिता, गुरु ही सच्चे मित्र।
गुरु के ज्ञान प्रकाश से, सुंदर जीवन चित्र॥
कुम्हार समान गुरु गढ़ें, शिष्य रूप अनमोल। ज्ञान प्रेम के रंग से, भर दें मीठे बोल॥
डगमग नैया जब पड़े, गुरु बनते पतवार।
गुरु कृपा से पार हो, भवसागर संसार॥
गुरु की महिमा क्या कहें, शब्द पड़ें सब मौन।
गुरु जैसा उपकार जग, कर सकता है कौन॥
धन दौलत से बढ़कर है, गुरु का पावन ज्ञान।
गुरु चरणों में जो झुके, उसका बढ़ता मान॥
गुरु दीपक बन राह में, हरते मन का अंधियार।
ज्ञान ज्योति से जगमग हो, जीवन का संसार॥
गुरु वाणी अमृत समान, पी ले जो इंसान।
उसके जीवन में सदा, रहता सुख-कल्याण॥
गुरु की कृपा जहाँ मिले, मिट जाए हर पीर।
सूनी राहें खिल उठें, जैसे सावन नीर॥
गुरु पूर्णिमा पर्व पर, मन में भरिए प्यार।
गुरु चरणों में अर्पित करें, श्रद्धा बारंबार॥
गुरु का आशीष जो मिले, भाग्य बने बलवान।
चन्द्रमती गुरु चरण में, अर्पित करती मान॥
गुरु बिन ज्ञान न चेतना, गुरु बिन मिले न ज्ञान।
गुरु ही जीवन की ज्योति हैं, गुरु को शत-शत मान॥






