रचनाकार: बाल कृष्ण मिश्रा
नई दिल्ली
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
🔱श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति🔱
जगज्जननी आदि शक्ति, आदि रूप धारिणी, महाकाली महालक्ष्मी, महासरस्वती रूपिणी।
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा कल्याणी, कूष्माण्डा स्कन्दमाता,
कात्यायनी सुखदानी॥ 1 ॥
कालरात्रि महागौरी, सिद्धिदात्री वरप्रदा,
नवदुर्गा नवशक्ति, सर्व सिद्धी दायिका।
दक्षकन्या सती साध्वी, शिवप्रिया मनमोहिनी, पार्वती हिमवान पुत्री, सर्व मंगल कारिणी॥ 2 ॥
सिंह वाहिनी त्रिनेत्र धारी, महिषासुर मर्दिनी, धूम्रलोचन वधकारी, चण्ड-मुण्ड विनाशिनी।
रक्तबीज संहारी माता, रौद्र रूप धारिणी, रणचण्डी महाकाली, काल सर्प गामिनी॥ 3 ॥
डमरू बाजे शंख बाजे, बाजे मृदंग झांझरी,तांडव नाचे आदि शक्ति, झुमे सकल सृष्टि री।
पाद प्रहार कम्प धरणी, गगन गूंजे गर्जना, भयभीत देव दानव, करे विनीत प्रार्थना॥ 4 ॥
जय भवानी जय कल्याणी, जय जगदम्बा कालिका, बाल कृष्ण शीश नवाए, रक्षा करो अम्बे मातिका।
कृपा दृष्टि बनाए रखना, संकट सब दूर करो, भक्ति भाव हृदय जगाए, सुख समृद्धि से झोली भरो॥ 5 ॥
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🔱श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति 🔱
जयति महाशक्ति स्वरूपा,
शिव-हृदय-विहारिणी,
प्रलय-काल-नृत्यातुरा, दनुज-वंश-विदारिणी।
डमरू-ध्वनि-संग थिरकती, चरण-चाप-कंपित-धरा,
त्रिलोकी-वंदिता माता, आदि-शक्ति करुणामयी, जगदुद्धरा।
रण-चंडी रूप धरे, नयन-अग्नि झलकावती,
मुंडमाल कंठ सोहे, खड्ग-हस्त चमकावती।
तांडव-लय-बद्ध पग, घुँघरू रुनझुन बाजत,
भक्त-रक्षण-हेतु माँ, विकराल रूप साजत।
सौम्य रूप गौरी तुम, तुम्हीं महाकाली विकट,
शरण आए भक्त के, संकट हरतीं तुम तुरंत।
सृष्टि-स्थिति-विनाश की, तुम्हीं आद्या मूल हो,
नमन तुमको जगदंबे, तुम ही सिद्धि-अनुकूल हो।
हुंकार उग्र प्रचंड माते! शत्रु-दल थर-थर काँपता,
तेज ओजस्वी देख तेरा, काल भी पग नापता।
अरि-कंठ-विदारण खड्ग चमके, असुर-मस्तक डोलते,
जो बढ़े सुत की ओर कुदृष्टि, प्राण उसके बोलते।
परम पावन सौम्य गौरी! अंचल में अमृत धार है,
‘बाल कृष्ण’ की पुकार पर, बहती करुणा अपार है।
ऋद्धि-सिद्धि नव-निधि दे, मिटातीं सब क्लेश को,
शीश नवाए ‘मिश्रा’ माँ! हर लो सकल द्वेष को।
॥इति श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति सम्पूर्णम्।।







