मन मचल रहा है आज, न जाने किस कारण, तेरी बहुत सता रही याद, न जाने किस कारण।

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कवयित्री चन्द्रमती चतुर्वेदी (चन्दू )

यु पी, बस्ती 

 अयोध्या धाम

 

(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

मन मचल रहा है आज, न जाने किस कारण,

तेरी बहुत सता रही याद, न जाने किस कारण।

 

 

दिल को नहीं करार आज, न जाने किस कारण,

तेरी बहुत सता रही याद, न जाने किस कारण।

तेरी गली से जब भी गुजरूँ, धड़कन बढ़ जाती है,

तेरी कही हुई हर बात, होंठों पर आ जाती है।

आँखों में तेरा रूप बसा, न जाने किस कारण,

तेरी बहुत सता रही याद, न जाने किस कारण।

 

 

चाँद खिला है नभ में लेकिन, मन मेरा उदास है,

ठंडी-ठंडी चलती पुरवाई, जैसे तेरा एहसास है।

भीग रहा है मन बरसात, न जाने किस कारण,

तेरी बहुत सता रही याद, न जाने किस कारण।

 

 

नींद मेरी रूठी रहती, रात गुजरती जाती है,

तेरी यादों की मधुर कहानी, मन में गुनगुनाती है।

दिल करता है कर लूँ बात, न जाने किस कारण,

तेरी बहुत सता रही याद, न जाने किस कारण।

 

 

दूर हो तुम फिर भी लगता, पास

 खड़े हो मेरे,

सूने मन के आँगन में हैं, आज भी रंग तेरे।

चन्द्रमती का दिल बेकरार, न जाने किस कारण,

मन मचल रहा है आज, न जाने किस कारण।

 

*********************

 

 ले रहा हमारी जान, तेरी मंद-मंद मुसकान,

कहीं न चैन मैं पाऊँ, बताओ कहाँ मैं जाऊँ।

 

चुपके से तुम जो देखो, दिल में हलचल मचती,

पलकों की ओट से फिर, बिजली-सी कुछ गिरती।

बिन बोले कह गये हो, दिल का सारा अरमान,

 

ले रहा हमारी जान, तेरी मंद-मंद मुसकान।

 

कहीं न चैन मैं पाऊँ, बताओ कहाँ मैं जाऊँ,

तुम रूठो तो मैं मनाऊँ, तुम हँसो तो मैं मुस्काऊँ। बताओ…….

 

कानों में धीरे-धीरे, तुम प्यार की बात कहना,

फिर सामने से होकर, यूँ अनजान मत रहना।

तेरी अदा निराली, तेरी अलग पहचान,

 

ले रहा हमारी जान, तेरी मंद-मंद मुसकान।

कहीं न चैन मैं पाऊँ, बताओ कहाँ मैं जाऊँ,

तुम रूठो तो मैं मनाऊँ, तुम हँसो तो मैं मुस्काऊँ।बताओ………..

 

 पास से तेरा गुजरना, खुशबू बिखेर जाना,

नज़रों से नज़र मिलाकर, फिर नज़रें फेर जाना।

ये कैसी दिल्लगी है, ये कैसा इम्तिहान,

 

ले रहा हमारी जान, तेरी मंद-मंद मुसकान।

कहीं न चैन मैं पाऊँ, बताओ कहाँ मैं जाऊँ,

 

तुम रूठो तो मैं मनाऊँ, तुम हँसो तो मैं मुस्काऊँ। बताओ……….

 

जब तुम सज के आओ, मौसम भी शरमा जाए,

तुम मुस्कुरा के देखो, दिल फिर कहाँ संभल पाए।

बस इतना कह रही हूँ, सुन लो मेरे मेहरबान,

 

ले रहा हमारी जान, तेरी मंद-मंद मुसकान।

 

कहीं न चैन मैं पाऊँ, बताओ कहाँ मैं जाऊँ,

तुम रूठो तो मैं मनाऊँ, तुम हँसो तो मैं मुस्काऊँ। बताओ……..

 

 

*********************

 

 

प्यार हमारा कोहिनूर, न कच्चा सोना है,

रूठे चाहे सारा जग, इसको नहीं खोना है।

 

प्यार हमारा पक्का धागा, टूटेगा ना साथ,

आँधी आये, तूफाँ आये, छूटे ना ये हाथ।

 

दुनिया चाहे जोर लगाये, चाहे लाख सताये,

सच्चे प्रेम की डोर भला क्या कोई तोड़ पाये।

जल जाए संसार मगर, रिश्ता नहीं बिखरना है,

प्यार हमारा कोहिनूर, न कच्चा सोना है।

 

बच्चों को भी सुनायेंगे हम, प्रेम की ये कहानी,

सच्चे रिश्ते की पहचान है, प्रीत हमारी पुरानी।

जनम-जनम तक साथ रहे ये, ऐसी है अभिलाषा,

प्रेम जहाँ सच्चा हो, वहाँ रहती नहीं निराशा।

दिन-दिन बढ़ता जाये प्यार, कम ना कभी होना है,

प्यार हमारा कोहिनूर, न कच्चा सोना है।

 

खुशी हमारे मन में बसती, जब तुम पास हमारे,

दूर हुए जब तुम हमसे तो, रोते नयन बेचारे।

सुबह-शाम मेरी नजरें बस, तुमको ही ढूँढें,

मन की सूनी गलियों में हम, तेरी यादें पूजें।

धड़कन में तुम, साँसों में तुम, जीवन का तुम कोना है,

प्यार हमारा कोहिनूर, न कच्चा सोना है।

 

कोई चाहे लाख मिटाये, कोई चाहे रूठे,

प्रेम की डोरी थामे रखना, रिश्ते कभी न छूटें।

संसार भले ही बदल रहा हो, बदले ना अनुराग,

सच्चे प्रेम की ज्योति जलाकर, हरना अपना भाग।

जग चाहे जो कहता जाये, प्रेम नहीं कम होना है,

प्यार हमारा कोहिनूर, न कच्चा सोना है।

 

राह कठिन हो, साथ तुम्हारा, फिर भी राह सुहानी,

तेरे मेरे प्रेम की जग में, सबसे सुंदर कहानी।

जन्म-जन्म का साथ हमारा, मन ने यही कहा है,

तू मेरा विश्वास बना है, मैं तेरी आसरा हूँ।

जब तक धड़कन चलती रहे, तब तक तुझको होना है,

प्यार हमारा कोहिनूर, न कच्चा सोना है।

 

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