संवाददाता कानड़: गोवर्धन कुम्भकार
(नया अध्याय)
6 बेड के अस्पताल का बिना भूमि पूजन के ही निर्माण कार्य शुरू हुआ।
84 गांव के लिए के लोगों के लिए यह सुविधा भविष्य में दुविधा न बन जाए।
कानड़: नगर के मेघराज पालीवाल बस स्टैंड के पीछे टिल्लर कॉलोनी में नगर सहित आसपास के अंचल के 84 गांवों के लिए प्रस्तावित 6 बेड के शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य होने से पहले भूमि पूजन होना था उसके पहले ही बीम कांलम के गड्ढे खोद दिए गए
गड्ढे खुदने के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा और असंतोष भी सामने आने लगा है।
रहवासियों का कहना है कि इतने बड़े अंचल और जनसंख्या के हिसाब से 6 बिस्तरों वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर्याप्त नहीं है, यहां कम से कम 30 बिस्तरों वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बनना चाहिए था।
नगर अंचल में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पहले से ही सीमित होने के साथ बेहतर नही है। नगर अंचल के 84 गांवों की बड़ी आबादी इलाज के लिए यहां निर्भर रहती है।
ऐसे में लोगों का मानना है कि यदि यहां 30 बिस्तरों वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनता तो मरीजों को बेहतर इलाज, विशेषज्ञ डॉक्टर और अन्य जरूरी सुविधाएं भी मिल पातीं।
इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
रहवासियों का यह भी कहना है कि कानड़ नगर और आसपास के गांवों की आबादी लगातार बढ़ रही है।
दुर्घटना, प्रसूति और गंभीर बीमारियों के मामलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत महसूस की जाती है।
यदि यहां 30 बिस्तरों वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनता तो एक्स-रे, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थियेटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती थी।
निर्माण स्थल पर काम शुरू होते ही कुछ लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर छोटी व्यवस्था कर दी गई तो भविष्य में यह सुविधा लोगों के लिए दुविधा बन सकती है।
उनका कहना है कि सरकार को क्षेत्र की आबादी और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़े अस्पताल की योजना बनानी चाहिए थी।
यदि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बड़े अस्पताल की योजना बनाई जाती तो यह क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता था। निर्माण स्थल पर काम शुरू होने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं यह सुविधा भविष्य में लोगों के लिए दुविधा न बन जाए।
लोगों का मानना है कि अस्पताल बनने के बाद भी यदि पर्याप्त सुविधाएं और डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे तो मरीजों को वही पुरानी परेशानियां झेलनी पड़ेंगी।
फिलहाल निर्माण कार्य की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और क्षेत्र की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना बनाएं, ताकि यह स्वास्थ्य सुविधा वास्तव में लोगों के लिए राहत साबित हो, न कि नई दुविधा।







