पवन वर्मा
(नया अध्याय, देहरादून)
शिवराज सिंह चौहान : सेवा के संदेश के साथ समानांतर सक्रियता की राजनीति।
मध्यप्रदेश की राजनीति में शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक प्रभावशाली और निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेता रहे हैं। चार बार मुख्यमंत्री रहने के बाद अब वे केंद्र सरकार में कृषि मंत्री हैं। दिलचस्प बात यह है कि मध्यप्रदेश में आज भी उनके ही दल की सरकार है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्था चल रही है। मध्यप्रदेश में सत्ता के औपचारिक ढाँचे से अलग रहने के बावजूद शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता प्रदेश की राजनीति में लगातार दिखाई देती है। यही सक्रियता अब एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे रही है,कि क्या वे सरकार से बाहर रहकर भी समानांतर राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं?
यह सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ अब मोहन यादव सरकार के पास हैं, लेकिन शिवराज सिंह चौहान अपने लोकसभा क्षेत्र विदिशा-रायसेन में लगातार कार्यक्रमों, अभियानों और जनसंपर्क के माध्यम से सक्रिय दिखाई देते हैं। राजनीति में सक्रिय रहना किसी भी नेता के लिए स्वाभाविक है, लेकिन जब यह सक्रियता सत्ता के समानांतर दिखने लगे तो उसके राजनीतिक अर्थ भी निकाले जाने लगते हैं।
राजनीति का स्वभाव यही है कि जब कोई नेता सत्ता में होता है तो वही केंद्र में रहता है। सत्ता से दूर होने पर उसका प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे में कई नेता सार्वजनिक जीवन में अपनी सक्रियता बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशते हैं। शिवराज सिंह चौहान के मामले में भी कुछ ऐसा ही परिदृश्य दिखाई देता है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी वे लगातार स्थानीय जनसंपर्क में सक्रिय हैं। उनके कार्यक्रमों की आवृत्ति और जनसंवाद की शैली को देखकर कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह केवल सामाजिक सक्रियता नहीं बल्कि राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखने की रणनीति भी हो सकती है।
सेवा का संदेश और राजनीति की वास्तविकता
अपने जन्मदिन 5 मार्च के अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने सेवा, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर जन्मदिन हमें यह याद दिलाता है कि जीवन का एक वर्ष कम हो गया है और इसलिए शेष जीवन समाज की सेवा में लगाना चाहिए। उन्होंने भारतीय दर्शन के सूत्र “आत्मवत् सर्वभूतेषु”, “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सियाराममय सब जग जानी” का उल्लेख करते हुए समाज में प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया।
यह संदेश निश्चित रूप से सकारात्मक है, लेकिन राजनीति में संदेश और वास्तविकता के बीच अंतर अक्सर दिखाई देता है। राजनीति में हमेशा ही एक अभियान के अनेक उद्देश्य जोड़ कर देखे जाते हैं। राजनीतिक हलकों में यह धारणा इसलिए भी बनती है कि जब कोई पूर्व मुख्यमंत्री इस तरह निरंतर सक्रिय रहता है तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि क्या यह केवल सामाजिक पहल है या प्रदेश की राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति। कई राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर भी देखते हैं।
अभियानों के जरिए जनसंपर्क
मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया था। उन्होंने स्वयं प्रतिदिन एक पौधा लगाने का संकल्प लिया और लोगों से भी ऐसा करने की अपील की। अपने जन्मदिन पर उन्होंने यह भी कहा कि वे फूल-मालाओं से स्वागत नहीं करवाएंगे, बल्कि यदि कोई व्यक्ति एक पौधा लगाए तो वही उनका स्वागत होगा। यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनके स्वागत में फूल-मालाओं की परंपरा कभी पूरी तरह थमी नहीं।
पर्यावरण संरक्षण निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण विषय है और इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है, लेकिन राजनीति में ऐसे अभियानों को केवल सामाजिक दृष्टि से नहीं देखा जाता, बल्कि उन्हें जनसंपर्क का एक प्रभावी माध्यम के रूप में भी जाना जाता है।
इसी क्रम में शिवराज सिंह चौहान ने अपने लोकसभा क्षेत्र में “मामा चलित अस्पताल” शुरू करने की घोषणा की है, जिसे सांसद निधि से संचालित किया जाएगा। यह चलित अस्पताल गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। लेकिन यहाँ भी एक सवाल उठता है। शिवराज सिंह चौहान 1991 से 2005 तक विदिशा से सांसद रहे, उसके बाद लगभग सोलह वर्षों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इतने लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रभाव के बावजूद भी उनके अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएँ अब भी गांव-गांव तक क्यों नहीं पहुँच सकी हैं और इसके लिए अब सांसद निधि से चलित अस्पताल की व्यवस्था क्यों करनी पड़ रही है?
इसी तरह उन्होंने “मामा कोचिंग क्लासेस” के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को निशुल्क मार्गदर्शन देने का संकल्प भी लिया है। मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिभा सम्मान और पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है। इन पहलों का सामाजिक महत्व जरूर है, लेकिन इनके माध्यम से जनसंपर्क का विस्तार भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
बदलता राजनीतिक परिदृश्य
67 वर्ष की उम्र तक शिवराज सिंह चौहान ने राजनीति के लगभग सभी दौर देख लिए हैं। उन्होंने प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए सत्ता संचालन का एक रिकॉर्ड बनाया। उस समय उनके आसपास समर्थकों और कार्यकर्ताओं का बड़ा जमावड़ा रहता था लेकिन केंद्रीय मंत्री बनने के बाद यह जमावड़ा स्वाभाविक रूप से कुछ कम हुआ है।
उनका लोकसभा क्षेत्र विदिशा-रायसेन लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसी क्षेत्र से अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज ने चुनाव लड़ा और बेहद आसानी से जीत हासिल की थी। इसलिए यह क्षेत्र भाजपा के लिए कभी बड़ी चुनौती नहीं रहा और शिवराज सिंह चौहान के लिए भी यह राजनीतिक रूप से सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है।
जन्मदिन के अवसर पर उनके संदेश में सेवा, प्रेम और पर्यावरण संरक्षण जैसे सकारात्मक तत्व स्पष्ट दिखाई देते हैं। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी बना हुआ है कि उनकी लगातार सक्रियता का वास्तविक उद्देश्य क्या है? क्या यह केवल सामाजिक पहल है या फिर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की रणनीति?
शायद इसका स्पष्ट उत्तर समय के साथ ही सामने आएगा। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि शिवराज सिंह चौहान की यह सक्रियता मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे रही है। (विनायक फीचर्स)







