सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
नवापारा/राजिम, रायपुर, (छ.ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
लेख –
“हनुमान जयंती: शक्ति व भक्ति का पर्व”
: सुश्री सरोज कंसारी
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हनुमान जयन्ती भगवान श्रीराम के परम् भक्त के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व, चैत्र माह की पूर्णिमा को आता है। इस दिवस विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें भक्त अपने प्रभु को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के भोग तथा प्रसाद चढ़ाते हैं। उनका जन्म अंजना तथा केसरी के घर हुआ था। उन्हें भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है। उनकी माता अंजना ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर, भगवान शिव शंकर ने उन्हें वरदान दिया था कि वह अंजना के कोख से जन्म लेंगे।
हनुमान जी महाराज! भगवान राम के परमभक्त थे। उन्होंने सारा जीवन राम के नाम पर समर्पित कर दिया था। उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर राम ने उन्हें अपना सबसे बड़ा भक्त माना था । पराक्रम की असंख्य गाथाएं प्रचलित हैं। उन्होंने लंका दहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राम की सेना के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जिससे राम को रावण पर विजय प्राप्त करने में मदद मिली।
राम के प्रति भक्ति अनन्य थी। वह राम को अपने जीवन का आधार मानते थे और उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर राम ने उन्हें अपना सबसे बड़ा भक्त माना था। जयंती के दिन भक्त अपने प्रभु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। रामायण, रामचरित मानस, सुंदरकाण्ड पाठ, हनुमान चालीसा, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करने से प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
बूंदी का भोग लगाने तथा जरूरतमंद लोगों को प्रसाद खिलाने से प्रसन्न होते हैं और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें भक्त अपने प्रभु के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम को प्रकट करते हैं । कई नाम हैं, जिनमें से बजरंगबली, मारुति, अंजनीपुत्र और पवनपुत्र प्रमुख हैं। वह अपनी शक्ति और भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं और भक्तों के लिए एक आदर्श हैं।
पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। वह हमारे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, जिससे जीवन में शान्ति, सफलता प्राप्त होती है। जयंती के दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लोग वहां जाकर मूर्ति पर सिंदूर और फूल चढ़ाते हैं और उनकी पूजा करते हैं, जिससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कहानी हमें सिखाती है कि भक्ति और शक्ति का संयोजन ही जीवन में सफलता दिलाता है। वह भगवान राम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति के लिए विख्यात हैं और भक्तों के लिए एक आदर्श हैं । जयंती के अवसर पर लोग अपने घरों में भी पूजा-अर्चना करते हैं। वे मूर्ति या तस्वीर को साफ-सुथरे स्थान पर रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं, जिससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
भक्ति से व्यक्ति को अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। वह हमें सिखाते हैं कि भक्ति और शक्ति के साथ हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जयंती का पर्व हमें भक्ति और शक्ति का स्मरण कराता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में भक्ति और शक्ति का संयोजन करने की प्रेरणा देता है।
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