मीडिया प्रभारी फिरोजपुरः राजीव कुमार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
वायु प्रदूषण, दूषित वातावरण के साथ-साथ अब ध्वनि प्रदूषण भी परेशानी का सबब।
ट्रैक्टर बने डीजे सिस्टम ऐरिया में खुले आम ट्रैक्टरों पर डीजे सिस्टम लगवाए।
शहर वासियों के लिए वायु प्रदूषण, दूषित वातावरण के साथ-साथ अब ध्वनि प्रदूषण भी परेशानी का सबब बनता जा रहा है। दिनभर भागदौड़ की जिंदगी में कुछ पल सकून के सभी चाहते हैं लेकिन उस सकून पर शहर में बढ़ता ध्वनि प्रदूषण भारी पड़ता जा रहा है। यह ध्वनि प्रदूषण उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक सिद्ध हो रहा है। इससे पूरा दिन कामकाज करने के बाद रात को नींद लेकर हर व्यक्ति अपनी थकान को दूर करना चाहता है, परंतु ऐरिया के कुछ लोग उनकी नींद के दुश्मन बने हुए हैं, जोकि न दिन देखते हैं न रात। ट्रैक्टर व अन्य वाहनों पर तेज आवाज में म्यूजिक चलाते हैं। ऐसे लोगों के प्रति पुलिस प्रशासन भी कार्रवाई करने में परहेज करता नजर आ रहा है।
ट्रैक्टर बने डीजे सिस्टम ऐरिया में खुले आम ट्रैक्टरों पर डीजे सिस्टम लगवाए जा रहे हैं, जिनमें तेज आवाज में सरेआम अश्लीलता पूर्ण गाने बजाए जाते हैं। इनकी आवाज इतनी तेज होती है कि उनके आसपास कुछ सुनाई देना बिल्कुल मुनासिब नहीं होता। जिस प्रकार शादी में डीजे बजाया जाता है, उससे भी तेज आवाज में दिन-रात ट्रैक्टरों पर डीजे सिस्टम बजाया जाना आम बात हो गई है।
भारी वाहनों के प्रेसर हार्न से परेशानी
शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ अन्य सड़कों पर भी भारी वाहनों में प्रयोग होने वाले प्रेशर हार्न भी छोटे वाहन चालकों व दुकानदारों के साथ आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। छोटे वाहन चालक अपने वाहनों पर सवार होकर जाते हैं तो पीछे से बेलगाम दौड़ते आने वाले वाहनों के हार्न की इतनी तेज आवाज होती है कि छोटे वाहन चालक उनकी आवाज से एकाएक संतुलन खो जाते हैं। इससे कई बार दुर्घटना का भी शिकार हो जाते हैं। ये प्रेशर हार्न ट्रक, ट्रैक्टर, बस, कैंटर व डंपर आदि पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दुकानदार व अन्य लोगों का कहना है कि ऐसे प्रेशर हार्न उनकी स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो रहे हैं। इसका असर सीधा दिमाग व कानों के पर्दों पर पड़ता है। ऐसे में यातायात अधिनियमों की धज्जियां उड़ाई जा ही हैं और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की जा रही है।
बुलेट बाइक से छूटते पटाखे, लोगों के दिलों में बैठता भय
ऐरिया में बुलैट बाइक पर नियमों से अधिक युवा सवार होकर शहर की गलियों व मुख्य स्थानों पर घूमते हैं, जिससे क्षेत्र वासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्कूल व कॉलेज आदि की छुट्टी होते ही कॉलेज के सामने व बस स्टैंड आदि मुख्य स्थानों पर बुलैट बाइक पर नियमों के विरुद्ध छात्र बैठकर नियमों का उल्लंघन करते रहते हैं। इनसे छूटने वाले पटाखे लोगों के दिल व दिमाग पर बुरा प्रभाव डालते हैं।
क्या कहते हैं लोग
इस समस्या के बारे में समाज सेवीयो कहना है कि इस प्रकार ट्रैक्टरों पर खुलेआम गाने चलाने का कोई नियम नहीं है, इससे सभी को परेशानी होती है। गलियों से गुजरते समय भी गाने चलाए जाते हैं जो कि अच्छे नहीं लगते। प्रशासन को इन पर शिकंजा कसना चाहिए। कई बार ट्रैक्टरों पर तेज आवाज में गाने चलाने वालों को समझाने पर झगड़ा करने को उतारू हो जाते हैं। किसी भी बड़े-छोटे के समझाने से नहीं मानते। पुलिस को ही ऐसे लोगों पर नकेल कसनी चाहिए
क्या कहते हैं अधिकारी
इस मामले में ट्रैफिक इंचार्ज जसविंदर सिंह का कहना है कि ऐसे वाहनों के समय-समय पर चालान किए जा रहे हैं। इस प्रकार के वाहन जो भी वाहन सड़कों पर दौड़ते मिलते हैं, उनको ज्यादातर बंद कर दिया जाता हैं उनकी ओर से 6 माह के अंदर अंदर 40 के करीब एसे वाहनों को बंद किया गया हैं । आने वाले दिनों में एसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा किसी भी जिला वासी को परेशानी नही आने दी जाएगी ।







