सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका
रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम,
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
“ठान लो तो सब कुछ संभव है”
: सुश्री सरोज कंसारी
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हमारे भीतर प्रकाश है पर वो प्रकाश हमेशा प्रकाशित तभी रहेगा जब हम शांत मन से जीवन जीते हैं, अपने आपको शीतल रखते हैं। जब हमें कोई बात, कोई घटित अतीत की यादें बार-बार विचलित, बार-बार दुखी नहीं कर पाती। साहस से जीना बड़ी बात होती है। साहस से जब रहते हैं तब हम बार-बार कोशिश यही करते हैं कि हमारी प्रसन्नता, हमारी खुशी, हमारी शांति की स्थिरता बनी रहे। संसार में मनुष्य ही सबसे शक्तिशाली होता है, क्या नहीं कर सकता, सब कर सकता है यदि ठान लें तो। जीवन में कठिनाई आती है पर हमें निखारने आती है, हमें तोड़ने नहीं आती है, हमें सिखाने आती है बस।
कविता:
”मानव!
तेरा यह सतत प्रयास रहे,
तेरे कारण किसी की आत्मा न दुखे।
तू कर्म कल्याण की खातिर करना,
तू नेक राह पर चलता रहे।”
इंसान जब संसार में गलत रास्ते पर चलने लगता है तभी उसका बुरा होता है। नेकी की राह बहुत मायने रखती है। नेक काम करते रहना चाहिए इंसान को। ईश्वर ने मानवता बनाई, सब मानव उसी से हैं, पर ईश्वर ने दानव नहीं बनाए हैं। आज संसार में हैवानियत बढ़ती जा रही है, इंसानियत हृदयों से एकदम खत्म होती जा रही है। इसका कारण दया है, धर्म का मूल है, अपनाना भूल गए हैं वो लोग जो सज्जन और भोले-भाले इंसानों के प्रति अपनी दृष्टि नेक नहीं रखते हैं, संवेदनशीलता नहीं अपनाते हैं।
दुःख जो हमें अनुभूति होती है कि हम दुखी हैं, पर वास्तविकता यह है कि वो दुःख वास्तविकता से ज्यादा हमारी कल्पना ही होती है। मानव अम्बर को भी छूता है और मानव ही मानव से संघर्ष करता है। आज आवश्यकता है लोगों के भीतर सद्भाव जगाने की, उन्हें विश्वबंधुत्व का पाठ पढ़ाने की…हमारी संवेदनाएं ही हमारी वास्तविक सुंदरता हैं, पर इस संसार में हर मन न सृजनशील है, न संवेदनशील। अधिकांश हृदयों में अब कठोरता और निर्दयता ने घर कर लिया है।
संसार के सब मनुष्यों का बड़ा शत्रु बाहर नहीं, उसके भीतर का अशांत मन ही होता है। जब मन में ईर्ष्या अथवा अहंकार घर कर लेते हैं, तब वही मनुष्य को मानवता से दूर कर देते हैं। प्रेम, करुणा और क्षमा ही वो शक्ति हैं जो हृदय को निर्मल बनाती हैं। यदि हम प्रतिदिन थोड़ा सा भी समय आत्मचिंतन में लगाते हैं तो हमें समझ आएगा कि जीवन का वास्तविक आनंद खुद को हर पल शांत रखने में है। हर क्षण आनंदित तब रहता है जब हम संतोष ज्यादा रखते हैं, जो भी है उससे पूरी तरह संतुष्टि महसूस करते हैं।







