सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, देहरादून)
मूसलाधार बारिश से केदार घाटी में जनजीवन प्रभावित।
बेमौसमी बारिश से काश्तकार चिंतित।
ऊंचाई वाले इलाकों के तापमान में गिरावट।

छह माह बुग्यालों में प्रवास करने वाले भेड़ पालकों ने निचले इलाकों की ओर किया रुख।
ऊखीमठ: केदार घाटी में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है। क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित होने के साथ ही बेमौसमी बारिश ने काश्तकारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश के कारण जहां खेतों में तैयार हो रही फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी हुई है, वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज होने से ठंड का अहसास भी बढ़ गया है।
क्षेत्र के के ऊखीमठ, मक्कू, फापंज, सारी, मनसूना, रांसी, गौंडार सहित विभिन्न क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। वहीं मद्महेश्वर और तुंगनाथ घाटियों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम और अधिक ठंडा हो गया है। बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को आवश्यक कार्यों के लिए भी घरों से बाहर निकलने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश से काश्तकार खासे चिंतित हैं। इन दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में खेतों में विभिन्न मौसमी फसलें तैयार होने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में लंबे समय तक बारिश होने से फसलों में रोग लगने, उत्पादन प्रभावित होने तथा खेतों में नमी अधिक बढ़ने की आशंका बनी हुई है। काश्तकार बलवीर राणा का कहना है कि सामान्य समय पर होने वाली बारिश जहां खेती के लिए लाभकारी होती है, वहीं इस समय हो रही लगातार बेमौसमी बारिश फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। काश्तकार रघुवीर सिंह नेगी के अनुसार बारिश के कारण खेतों में कामकाज भी प्रभावित हुआ है। काश्तकार मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फसलों की देखभाल सहित अन्य कृषि कार्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
भेड़ पालक वीरेन्द्र धिरवाण ने बताया कि मद्महेश्वर घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ तापमान में गिरावट आने से ठंड बढ़ गई है। मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चोपता और आसपास के बुग्याली क्षेत्रों में मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है। दिन के समय भी ठंडी हवाओं के चलने से तापमान में गिरावट महसूस की जा रही है।
मौसम में आए इस बदलाव के बीच छह माह तक ऊंचाई वाले बुग्यालों में प्रवास कर पशुपालन करने वाले भेड़ पालकों ने भी अब धीरे-धीरे निचले इलाकों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। बारिश और ठंड बढ़ने के कारण भेड़ पालक अपने पशुधन के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर लौट रहे हैं।









