सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका, शिक्षिका
रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम
रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
सही हैं तो सफाई देने की जरूरत नहीं
: सुश्री सरोज कंसारी
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सही को साबित करने की जरूरत नहीं। आज जीवन के हर मोड़ पर भ्रम का इतना जाल है कि हर कोई खुद को साबित करने में लगा है। सही काम खुद सिद्ध होता है, इस बात को समझना जरूरी है। जब आपकी सोच, राह, व्यवहार और कर्म सही हों तो चलते रहिए, पीछे मुड़कर ये मत देखिए कि लोग क्या कह रहे हैं, नहीं तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे और उलझकर रह जाएंगे। यहाँ लोगों की मानसिकता हर पल बदलती है। हर बात पर सफाई देना आपकी मानसिकता को कमजोर बनाता है और यह सिद्ध करता है कि कहीं न कहीं आपको डर है कि कोई नाराज न हो जाए। लोगों की सोच को जो ज्यादा दिमाग में लेते हैं वे अंतर्युद्ध से घिरे होते हैं। आपकी आत्मा जिस कार्य के लिए गवाही दे, उसे कीजिए। अगर आप सही हैं तो निर्भीक होकर रहिए।
शांत, सरल और सक्रिय स्वभाव आपके भीतर आत्मविश्वास उत्पन्न करता है इसलिए किसी बात पर उदास मत रहिए। किसी के कहने से ही आप वैसे नहीं बन जाते जैसे वो सोचते हैं, जिसकी जितनी समझ उतना ही वो कहता, सुनता और देखता है। आपके लिए जो सही है उसे करते रहिए और बिना किसी शोर के मेहनत कीजिए, बेहतर परिणाम मिलेंगे। जब आप मन और कर्म से किसी कार्य के लिए समर्पित होते हैं, जिसमें पूरी सच्चाई होती है, जिसमें आपकी खुशी होती है, तब मन उत्साहित होता है, कोई चिंता नहीं होती, सोचकर आप परेशान नहीं होते और उसे करने में मानसिक सुकून मिलता है। आप अपने जीवन का सर्वांगीण विकास करने और हित-अहित का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी को बताने की जरूरत नहीं कि क्यों कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं, लोगों को बस सफल होकर दिखाइए वही आपके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
अगर आप सही दिशा में जा रहे हैं तो कोई ईर्ष्या करे, नफरत करे, ये उनकी समस्या है जो बेवजह अपनी मानसिक शांति नष्ट कर रहे हैं और अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं, आप बस साहस रखिए। सच्चाई हर बाधा को पार कर एक दिन मंजिल तक पहुंच ही जाती है और झूठे व्यक्ति का सिर झुकता ही है। सही व्यक्ति संघर्ष में तपकर एक दिन निखरते हैं। जीवन की राह में कई लोग ऐसे भी आएंगे जो आपकी प्रसिद्धि, पद, लोकप्रियता और कामयाबी देखकर आपको रोकने, तोड़ने, गिराने, अपमानित और बदनाम करने की कोशिश करेंगे। लोगों की बातों को जितना मन में रखेंगे उतने ही कमजोर बनेंगे, इसलिए हर हाल में मजबूत रहना और जिस कार्य के योग्य हैं उसे करते रहना। अपनी तरफ से कार्य करते रहिए, कभी भी किसी बात से मजबूर होकर झूठ का सहारा मत लीजिए। मिठास रखिए अपनी वाणी में।
गहरी, सकारात्मक काव्य:
तू बस करता जा
तेरी धैर्यशीलता और
निरंतरता में ही
तेरे परिणाम छिपे हैं।
प्रतिदिन शांत मन से किए गए प्रयासों का स्वाभाविक परिणाम ही सफलता है। चिंता छोड़कर बस अविरल चलते रहना है। हमारी निरंतरता और धैर्य ही मायने रखते हैं। आज हमें तर्क-वितर्क नहीं करना है, बल्कि परिणाम सामने लाकर दिखाना है। हम सही, निर्मल और निरंतर अपने मार्ग पर बढ़ रहे हैं और अपने कर्मों को मजबूत बना रहे हैं। हमें शोर मचाने की आवश्यकता इसलिए नहीं पड़ती, क्योंकि हम सही हैं।








