गणेश उत्सव एक प्रेरणा है!

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सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री, लेखिका, शिक्षिका 

रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम, 

रायपुर (छत्तीसगढ़)

 

 

                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

आलेख: गणेश चतुर्थी विशेष

 

             गणेश उत्सव एक प्रेरणा है!

                : सुश्री सरोज कंसारी

         ——————————–

 

विघ्नहर्ता हैं गौरी पुत्र श्री गणेश। भारत की भूमि का हर कण पावन है। यहाँ हर पग पर एक त्योहार है, जहाँ विभिन्न धर्म-संस्कृति आकर मिल जाती हैं। अपनी मिलनसार प्रवृत्ति और एकता की भावना के कारण हर पल एक नई उमंग का संचार होता है। यहाँ हर पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है और अपनी परंपरा का निर्वहन किया जाता है। धर्म-कर्म, हवन-पूजन से एक सुखद वातावरण का निर्माण होता है। समय-समय पर धार्मिक आयोजन सामूहिक रूप से होते रहते हैं। आपसी सहयोग से दुर्गा पूजा, जन्माष्टमी, सावन झूला, रामनवमी, संक्रांति पर्व, महाशिवरात्रि आदि मनाते हैं। एक महत्वपूर्ण उत्सव है गणेश स्थापना। गौरी पुत्र गणेश प्रथम पूज्य हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका पूजन किया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन घर-घर में, गली-मोहल्ले में गणेश स्थापना की जाती है, जो बाल रूप में अति प्रिय हैं। गणेश जी के बहुत से नाम हैं – गजानन, एकदंत, गणपति, विनायक, शुभकर्ता-सुखकर्ता, विघ्नहर्ता, लंबोदर आदि। गणेश जी की पूजा, ध्यान, स्तुति के बिना कोई भी मांगलिक कार्य प्रारंभ नहीं होता। वे रिद्धि और सिद्धि के स्वामी हैं। दूब, शमी पत्र, मोदक, लड्डू उन्हें प्रिय हैं। श्री गणेश जी को बलशाली और बुद्धि का देवता कहा जाता है। उनकी शारीरिक संरचना बहुत ही आकर्षक और मनमोहक है। उनके हर अंग की एक अलग विशेषता है – छोटी आँखें, लंबी सूँड़, सूप जैसे कान, बड़ा पेट, विशाल मस्तक, नन्हे पैर, जिनसे हमें बहुत कुछ सीख मिलती है। गणेश जी के जीवन की अनुकरणीय बातें जो हमें प्रेरित करती हैं – माता-पिता श्रेष्ठ होते हैं, संसार में हर रिश्ते से बढ़कर हैं, जिनके चरणों में चारों धाम हैं। उनके आशीर्वाद के बिना कोई काम सफल नहीं होता। जो उनके आज्ञाकारी और सेवाभावी नहीं हैं तो कितने भी चढ़ावे, छप्पन भोग लगा दें, ईश्वर कभी प्रसन्न नहीं होंगे। ध्यान से सुनने की आदत रखें, हर किसी की बात को ध्यान से सुनना चाहिए, सुनकर अच्छे गुणों को ग्रहण करें। हर व्यक्ति में विशेषता होती है, किसी की उपेक्षा न करें। मुसीबत में साथ देना ही मानवता है। मदद करना – जब भी अवसर मिले किसी के कष्ट-पीड़ा, दुख-दर्द को दूर करने के लिए आगे रहें, किसी के चेहरे पर खुशियाँ देकर खुद को धन्य करें। सक्रिय रहें, सुप्त अवस्था में रहने से और खाली बैठने से मनुष्य निराशा के घोर अंधकार में डूब जाता है। अपनी बुद्धि के प्रयोग से हर कठिन कार्य को संभव कर सकते हैं। दूसरों के बहकावे में आकर बिना सोचे कोई कार्य नहीं करना चाहिए। बचपना को जीवित रखें, चंचल रहें, एकदम गंभीर और चिंता में डूबे न रहें। हर पल का आनंद लेना ही जीवन है, हँसते-खेलते और मुस्कुराते रहें अपनों के संग। जीवन का कोई भी दौर हो रुकें नहीं, बस आप दौड़ते-भागते, उछलते-कूदते रहिए, इतना भी नहीं कर सकते तो चलिए, स्थिर और आलसी न रहें, स्वस्थ, व्यस्त और मस्त रहना जरूरी है। सहनशील बनें, अपनी सोच विशाल रखिए, कुंठित नहीं सकारात्मक दृष्टि रखें, हीन भाव से ग्रसित न हों, किसी के कुटिल व्यवहार, क्रोध, ईर्ष्या, जलन, छल-कपट, ताने और अप्रिय वचन से विचलित न हों, सभी को सहन करने की आदत रखें, कभी कमजोर नहीं होंगे। खुद को स्वीकार करें और हर परिस्थिति में प्रेम करें, जीवन की किसी अप्रिय घटना के लिए खुद को दोषी न मानें, अफसोस न करें, जो होता है वो होनी है जिस पर हमारा जोर नहीं, इसलिए जैसे हैं ठीक हैं, खुद को सांत्वना भी देते रहें और सर्वांगीण विकास की दिशा में प्रयास करते रहें। कर्तव्यशील बनें, जिस क्षेत्र में हैं उस कार्य को मन, कर्म और वचन से पूर्ण करें, कभी भी अधूरा न छोड़ें, ईमानदारी पूर्वक करें, कोई भी बाधा आ जाए घबराएँ नहीं, डटकर सामना करें, खुद को कमजोर न होने दें, पूरी लगन से करने पर उस दिशा में सफलता एक दिन मिलती ही है, कभी पीछे मुड़कर न देखें, हर चुनौती के लिए तैयार रहें। रिश्तों में लाभ-हानि की परवाह न करें, श्री गणेश जी की सवारी मूषक है जो हमें बताती है कि अपने सानिध्य में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को छोटा न समझें और न ही भेदभाव करें, मन मिले, जिनके विचार आपके हृदय को स्पर्श करें और जो रुचिकर हों उनका सम्मान करें, उसके साथ मित्रता निभाइए। विश्वासघात पाप है, जो आपके ऊपर आँख मूँदकर विश्वास करते हैं उस विश्वास को बनाए रखिए, कभी तोड़ें नहीं। गणेश जी को लड्डू बहुत पसंद हैं जो कहते हैं कि जीवन में हर कड़वाहट को भूलकर मधुर संबंध स्थापित करें, आत्मीय वार्तालाप से आपसी व्यवहार में मिठास बनाए रखिए, बात को गोपनीय रखने की हुनर रखें, जो कहने योग्य नहीं है उसे अपने तक ही सीमित रखने की आदत विकसित करिए। सिर्फ गणेश जी की स्थापना कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, उनके गुणों को धारण कर लेने से मानव जीवन सफल होगा। शील-संयम, साहसी और पराक्रमी हैं गणपति जी, मंगलकारी हैं। पवित्र भाव से उनकी आराधना करने से निश्चित ही कार्य सिद्ध होंगे। सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं, पूरी विधि-विधान से पूजन-आरती करने से और उसके पौराणिक महत्त्व की जानकारी रखकर आत्मसात करने से ही भारतीय परंपरा को बढ़ा पाएँगे। पूरी निष्ठा, श्रद्धा, भक्ति से श्री गणेश की सेवा कर विश्व शांति, सद्भाव, सद्गति, सद्विचार के लिए प्रार्थना करें।

 

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