”खुद को दबाव से दूर रखो!”

Spread the love

 

 

सुश्री सरोज कंसारी

(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)

रिपोर्टर एवं उद्घोषिका

नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)

 

                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

  लेख:

         ”खुद को दबाव से दूर रखो!”

  :सुश्री सरोज कंसारी

 

 ————————————

 

    यह जीवन है, और चलते रहना नियति है। मनुष्य मन की गहराई में अनंत कल्पनाएँ होती हैं। भावनाओं के इस अथाह सागर में डुबकी लगाते हुए हम अनवरत अपने पसंद की जिंदगी जीने के लिए उत्साहित होते हैं। मनुष्य जीवन बड़े ही सौभाग्य की बात है। इसे साकार करने के लिए हमें हमेशा सजग रहना चाहिए। किसी भी कार्य को पूर्ण साधना के साथ करते हुए उसका आनंद लेना है। जीवन का कोई भी क्षेत्र हो, मन को बोझिल मत कीजिए। प्यार से ही हर काम में सफलता मिलती है। एक सुखी-सुंदर और व्यवस्थित जीवन शैली के निर्माण के लिए हर मनुष्य प्रयास करता है। इच्छा के विरुद्ध करते हैं तो मन नहीं लगता, यही वजह है कि उसके परिणाम भी बेहतर नहीं आ पाते।

 

याद रखिए! इतनी बड़ी दुनिया है और अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए, जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए कभी-कभी औरों के सुख के लिए भी हमें जीवन में त्याग-समर्पण करना पड़ता है। जो दबाव से मुक्त होकर अपने जीवन के पथ पर चलते हैं, वे सुखी रहते हैं। जितना हो सके हम मानसिक दबाव से मुक्त रहें, हर तरह के कार्य हमें करने पड़ते हैं क्योंकि यह जीवन है, अपनी इच्छा से नहीं चलता, लेकिन किसी भी बात को अपने ऊपर इतना हावी मत होने दीजिए कि आपका मन शून्य हो जाए और आप कुछ भी करने में असमर्थ महसूस करें।

 

जीवन के इस सफर में चलते हुए, किसी न किसी तरह का दबाव बना रहेगा। सरल-सुखी और शांत जीवन के निर्माण के लिए हमें ही हर पल प्रयास करना है। दबाव को अपने दिमाग में हावी न होने दें। मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए हर तरह के दबाव से मुक्त रहिए। जो समस्या है, उसका समाधान सहजता से कीजिए। दबाव में रहकर हम ज्यादा दूर तक सफर नहीं कर सकते। मन के थक जाने से तन भी कमजोर होता है। शारीरिक-मानसिक मजबूती के लिए सक्रिय-साहसी और उत्साहित बनिए। दबाव मुक्त रहने के लिए दिल में असीम प्रेम रखिए।

 

याद रखिए! यह जीवन सिर्फ सफर है, ठहरना नहीं। जब हम अति मोह वश रिश्ते-नाते, मित्र-परिचित, पद-प्रतिष्ठा, सम्मान, जोश-जवानी में ही लिप्त हो जाते हैं, तब किसी न किसी तरह मानसिक द्वंद्व होता है। जीवन में मिलने वाला हर इंसान आपकी आंतरिक भावनाओं को नहीं जानता, जिसकी जैसी सोच होती है वैसा ही व्यवहार मिलता है, इसलिए किसी बात पर तनाव मत लीजिए। अपने मन की शांति और जीवन में सुकून के लिए दबाव मुक्त होकर कार्य कीजिए। कई बार कार्य की अधिकता, जिम्मेदारी, सपने, उम्मीद के कारण दबाव होता है। हद से ज्यादा सोचने से मानसिकता बोझिल होती है। जब तक जीवन है, कर्तव्य निभाना है। मन के विरुद्ध जब हम कोई कार्य करते हैं, जो कार्य हम किसी मजबूरी में करते हैं, तब अनावश्यक तनाव से गुजरना होता है। जीवन के हर क्षेत्र में समन्वय बनाकर रखिए। अंतर्द्वंद्व में उलझे रहने की बजाय अपने रुचिपूर्ण कार्य करते रहिए। दबाव मुक्त जीवन के लिए जो आप नहीं कर सकते, उसके लिए स्पष्ट मना करने की आदत रखिए। 

 

      आप अपने कार्य-व्यवहार से दुनिया के हर एक व्यक्ति को खुश नहीं रख सकते। जो आपके हैं, उनसे दिल से जुड़े रहिए। बाकी व्यर्थ आलोचना, ईर्ष्या, टीका-टिप्पणी करने वालों से दूरी रखिए। अपने सपनों को पूर्ण करने में अपनी पूरी ताकत लगा दीजिए। हर हाल में शांत रहना सीखिए। फालतू बातों पर ध्यान मत दीजिए। जो सच है, उसे हिम्मत से कहिए! हर समय मानसिक दबाव में रहने से दिमाग विचलित होता है। गुस्सा-चिड़चिड़ापन होता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या बढ़ जाती है – सिरदर्द, बी.पी., निराशा, थकान आदि। दिमाग अस्त-व्यस्त हो जाता है, किसी काम को एकाग्र होकर नहीं कर पाते। “कर्तव्यनिष्ठा और प्रेमपूर्ण अस्तित्व ही जीवन की वास्तविक सार्थकता है। सर्वदा सत्कर्म में लीन रहें और सर्वकल्याण की भावना रखें, किंतु इस यात्रा में आत्म-बोध और स्वाभिमान को कभी ओझल न होने दें। हर परिस्थिति में स्वयं को आनंदित और संतुष्ट रखना ही परम सत्य है।”

 

  • Related Posts

    सादगी को ही समझदारी समझना

    Spread the love

    Spread the love  सुश्री सरोज कंसारी (कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका) रिपोर्टर एवं उद्घोषिका नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)                     (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)    …

    दस साल से एक ही एजेंडा

    Spread the love

    Spread the love    सुनील कुमार वर्मा बिलासपुर, छत्तीसगढ़                             (नयाअध्याय, उत्तराखण्ड) 

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    सादगी को ही समझदारी समझना

    • By User
    • September 21, 2026
    • 5 views
    सादगी को ही समझदारी समझना

    ”खुद को दबाव से दूर रखो!”

    • By User
    • September 21, 2026
    • 10 views
    ”खुद को दबाव से दूर रखो!”

    दस साल से एक ही एजेंडा

    • By User
    • September 21, 2026
    • 10 views
    दस साल से एक ही एजेंडा

    सशक्त हस्ताक्षर की 52 वीं काव्य गोष्ठी संपन्न 

    • By User
    • September 21, 2026
    • 9 views
    सशक्त हस्ताक्षर की 52 वीं काव्य गोष्ठी संपन्न 

    कुलपति चयन: विद्वता का सम्मान या जुगाड़ का पुरस्कार?

    • By User
    • September 21, 2026
    • 9 views
    कुलपति चयन: विद्वता का सम्मान या जुगाड़ का पुरस्कार?

    गैंडा: अस्तित्व की लड़ाई लड़ता विशाल प्राणी          

    • By User
    • September 21, 2026
    • 10 views
    गैंडा: अस्तित्व की लड़ाई लड़ता विशाल प्राणी