सुश्री सरोज कंसारी
(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)
रिपोर्टर एवं उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
सादगी को ही समझदारी समझना
: सुश्री सरोज कंसारी
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आज हम देख रहे हैं और जान रहे हैं कि इस संसार में लोग जीवन को प्रतिदिन सरल और सहज बनाने के बजाय उसे जटिल बनाते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है कि लोग सादगी से कम जीते हैं, अहंकार और वहम में रहते हैं। वास्तविक जीवन हमारी सादगी में ही तो होता है। दुनिया को देखने के बजाय स्वयं को सहज और सरल बनाए रखना चाहिए।
कविता:
सादगी से जीवन जीना!
जटिलता को दूर करना सीखना।
सहजता में ही सुख है,
इसी में जीवन है।
सरल व सहज बने रहना
मानवता के पथ पर बढ़ते हुए।
हम सब मनुष्य बनकर रहें। यदि सभी लोग ईश्वर का बोध कर लें, तो इस संसार में कोई भी बुरा कर्म कभी नहीं कर सकता। यदि लोगों के हृदय से ईर्ष्या और बैर पूर्ण रूप से दूर हो जाएँ, तो अन्याय से दुखी और व्याकुल यह धरा सादगी, सरलता और सद्भावना से खिल उठेगी और लोग एक-दूसरे से संघर्ष करना बंद कर देंगे।
आज हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता मरती हुई संवेदनशीलता को जगाना है, धरा को निराशा से दूर करना है और सबके कल्याण के लिए सोचने की चेतना को जागृत करना है। हमारा सच्चा और सुंदरता से भरा जीवन सादगी में ही होता है, इसलिए सादगी से जीना चाहिए। कभी भी अनावश्यक विचार अपने मन में न आने दें और अधिक सोचकर स्वयं को कमजोर न करें, इसका ध्यान रखना आवश्यक है। मनुष्य को सादगी को ही जीवन का आधार बनाना चाहिए, जीवन को जटिलता के आवरण से मुक्त रखना चाहिए और इसे पूर्ण सहजता के साथ जीना चाहिए।






