सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
पीएचसी ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को लेकर नौवें दिन भी धरना जारी।
केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन्त तिवारी व पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजाराम सेमवाल ने आंदोलन को दिया समर्थन।
ऊखीमठः प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को लेकर तहसील परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना नौवें दिन भी जारी रहा। स्वास्थ्य सुविधा के विस्तार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय संगठनों ने समर्थन देते हुए सरकार से शीघ्र शासनादेश जारी करने की मांग की। धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि ऊखीमठ सहित दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय से संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रही है। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उच्चीकरण क्षेत्र की वर्षों पुरानी आवश्यकता है।
धरना स्थल पर पहुंचे केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि ऊखीमठ धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के साथ ही सीमान्त गांवों का प्रमुख केंद्र भी है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और तीर्थयात्री पहुंचते हैं। ऐसे क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पीएचसी ऊखीमठ का उच्चीकरण किसी एक गांव अथवा क्षेत्र की मांग नहीं, बल्कि व्यापक जनहित से जुड़ा विषय है। सरकार को जनभावनाओं को देखते हुए सकारात्मक निर्णय लेकर शीघ्र शासनादेश जारी करना चाहिए।
पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन्त तिवारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है। ऊखीमठ क्षेत्र के ग्रामीणों को सामान्य उपचार से लेकर गंभीर परिस्थितियों में भी जिला मुख्यालय अथवा अन्य बड़े अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उठ रही पीएचसी उच्चीकरण की मांग पर अब ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों को समर्थन देते हुए कहा कि मांग पूरी होने तक क्षेत्र की जनता के साथ खड़े रहेंगे।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजाराम सेमवाल ने कहा कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को आंदोलन के लिए मजबूर होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऊखीमठ तहसील के दूरस्थ गांवों की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि पीएचसी के उच्चीकरण से क्षेत्र की बड़ी आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। सरकार को आंदोलन की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
धरना स्थल पर व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट ने कहा कि ऊखीमठ क्षेत्र में वर्षभर स्थानीय आबादी के साथ बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही रहती है। केदारनाथ, मद्महेश्वर और तुंगनाथ सहित पंचकेदार यात्रा से जुड़े क्षेत्रों का प्रमुख प्रवेश क्षेत्र होने के कारण यहां सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। इसके बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सीमित संसाधनों में संचालित हो रहा है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव की ओर से पूर्व में दिए गए आश्वासन के अनुसार 15 दिन में शासनादेश जारी होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीएचसी ऊखीमठ के उच्चीकरण को लेकर शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वक्ताओं ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और ग्रामीणों से आंदोलन को व्यापक समर्थन देने का आह्वान किया।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने शासन से मांग की कि पीएचसी के उच्चीकरण के साथ पर्याप्त चिकित्सक, विशेषज्ञ सेवाएं, आवश्यक उपकरण, जांच सुविधाएं और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। आंदोलनकारियों ने कहा कि नौ दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे आंदोलन के बावजूद यदि शासन स्तर पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देने पर विचार किया जाएगा। आन्दोलन के नौवें दिन पूर्व कनिष्ठ प्रमुख शैलेन्द्र कोटवाल, अषाढ़ सिंह धिरवाण, सभासद बलवीर पंवार, महावीर सिंह रावत, कर्मवीर बर्त्वाल, मदन धर्म्वाण, पूर्व प्रधान जगदीश लाल, बलवन्त रावत, मदन सिंह पंवार, महेन्द्र सिंह रावत, अनुसूया प्रसाद टमटा, दिनेश जमलोकी, तेज प्रकाश त्रिवेदी, सभासद प्रदीप धर्म्वाण, राजपाल सिंह पंवार, प्रताप सिंह धर्म्वाण, शिव शरण पंवार, जयन्त नैथानी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, व्यापारी और आन्दोलनकारी मौजूद रहे।






