नोबेल पुरस्कार और ट्रम्प महोदय की मसखरी।

Spread the love

 

राजकुमार कुम्भज

जवाहरमार्ग, इन्दौर

 

            (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

       नोबेल पुरस्कार और ट्रम्प महोदय की मसखरी।                                   ____________________

 

            अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकीभरी खीझ और हताशा के बाद भी, स्टाॅकहोम स्थित स्वीडिश नोबेल शाँति समिति ने,ट्रम्प के दुराग्रह को एक बार फिर ठेंगा दिखा दिया है और हैरानी होती है कि ट्रम्प महोदय नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में मसख़री कर रहे हैं।

 

            कहने वाले कह सकते हैं और कहते ही हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प एक बेहतरीन प्रतीकात्मक मसखरे कलावादियों की पाॅंत के सबसे महँगी आयटम हो गये हैं!

 

                    विश्व प्रसिद्ध व स्वीकृत महान् रूसी साहित्यकार सोल्ज़ेनित्सिन ने साहित्य के नोबेल पुरस्कार की निरर्थकता को “आलू का बोर” कहकर भयानक हद्द पीट दी थी, लेकिन ट्रम्प महोदय ऐसी कोई तर्क-सँगत टिप्पणी देने की बजाय,”मुझे दे दो-मुझे दे दो”  की तोतारटंत में लगातार लगे हैं।

 

   सर्वशक्तिमान देश अमेरिका के सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पुनः पुनः चाहते रहे हैं कि विश्व शाँति नोबेल पुरस्कार उन्हें दिया जाए। इस शाँति नोबेल के लिए, अपनी योग्यता और पक्षता के आधार तथा प्रमाण आदि की घोषणा के संदर्भ में, उन्होंने आठ युद्ध रोकने की बात कही है।

 

     ट्रम्प महोदय का कहना है,बल्कि दावा है कि उन्हें एक नहीं, आठ शाँति नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए थे; क्योंकि उन्होंने आठ युद्ध खत्म करवाने का काम किया है?

 

      हमेशा से ही मुख्यतः उनका कहना यही रहता आया है कि उन्होंने ही परमाणु हथियार संपन्न भारत-पाक युद्ध रोककर पाँच करोड़ लोगों का जीवन बचाया है, जबकि भारत हमेशा से ही ट्रम्प की इस हताशाभरी दंभोक्ति को रद्द करता रहा है।

 

          दुनिया जानती है कि विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा भंडार आज अमेरिका के पास है। दुनिया यह भी जानती है कि विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा सौदागर भी अमेरिका ही है।यही नहीं, सर्वाधिक परमाणु हथियार भी आज उसी के कब्जे में हैं.

 

            क्या ये अन्यथा है कि इन्हीं खतरनाक मानव-निर्मित मानव-विरोधी हथियारों के बल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प संसारभर के शाँतिप्रिय देशों को गाहे-बगाहे धमकाते रहते हैं।

 

      सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने अति-उत्साह में, अपने इसी अति-बेहूदा कार्ड के आधार पर,मौका-ब-मौका स्वीडिश नोबेल अकादमी की निष्पक्षता, ईमानदारी और साख पर बट्टा लगा देने वाला बुद्धिहीन-प्रलाप भी दोहराते रहते हैं।

 

           राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आरोप है कि लोकतंत्र विरोधी और सभ्यता-संस्कृति के दुश्मन कुछ कट्टरपंथी विचारधारा के लोगों ने नोबेल शांति पुरस्कार की साख को धक्का पहुँचाते हुए हमेशा-हमेशा के लिए इसकी गरिमा को समाप्त कर दिया है।

 

    यहाँ यह समझ पाना जरा भी मुश्किल नहीं होना चाहिए कि डोनाल्ड ट्रम्प महोदय ऐसा आरोप सिर्फ इसलिए लगा रहे हैं कि साम-दाम-दंड-भेद के बावजूद, नोबेल समिति ने उन्हें विश्व शाँति नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया है। (विचारणीय तक भी नहीं माना)

 

                   ट्रम्प महोदय के आरोप का आशय बिना किसी झिझक के साफ-साफ कुछ इस तरह भी समझा जा सकता है कि स्टाॅकहोम स्थित स्वीडिश नोबेल शाँति अकादमी के सामने ट्रम्प की हताशाभरी कुटिलताओं का कोई भी काॅर्ड नहीं चल पा रहा है। वे यह भी कह रहे हैं कि वे इस बात को जीवनभर याद रखेंगे और कभी भी नहीं भूलेंगे कि नोबेल समिति ने उन्हें ये पुरस्कार नहीं दिया।

 

         इसी बीच दक्षिण अफ़्रीका में भारतीय तमिल मूल की न्यायविद् , रँगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाली तथा युद्ध-अपराधोंं और मानवाधिकार उलँघनों‌ की लंबी लड़ाई लड़ जाने वाली 85 वर्षीय नवनेथम नावी पिल्लई को विश्व शांति नोबेल पुरस्कार (वर्ष 2026) के योग्य स्वीकार कर लिया गया है।

 

नवनेथम नावी पिल्लई,

      विश्व शाँति और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों को बढ़ावा देने के लिए, न‌ सिर्फ प्रयासरत रही हैं, बल्कि अपनी विवेकपूर्ण प्रतिबद्धताओं से लंबी लड़ाइयाँ भी लड़ती रही हैं।इतना ही नहीं, नावी पिल्लई को संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त होने का गौरव भी हासिल हुआ है और वे संयुक्त राष्ट्र की ओर से फलस्तीनी क्षेत्र के जाँच-आयोग की सक्षम अधिकारपूर्वक अध्यक्षता कर चुकी हैं। इस‌ तरह विश्व समुदाय में उनकी मुहिम को सम्मान की दृष्टि से पहचाना जाता है।

 

                         बावजूद इसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हताशाभरी खीझ तो यही दोहराती है कि नावी पिल्लई को कोई नहीं जानता है। ट्रम्प महोदय कहते हैं कि वर्ष 2026 का विश्व शाॅंति नोबेल एक ऐसे वास्तविक उदारवादी शख़्स को दे दिया गया है, जो सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के हितों के लिए काम करता है और दुनिया जिसके बारे में इससे अधिक कुछ भी नहीं जानती है। (ये असत्य है)

 

 

           ट्रम्प महोदय दुनियाभर में आठ युद्ध रूकवा देने का दंभ भरने के साथ ही साथ अपना ये खोखलापन भी जिहिर कर रहे हैं कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध भी जल्द ही समाप्त करवा देंगे। (ये असंभव है)

 

       कृपया ग़ौर कीजिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की, विश्व शाँति नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में की गईं, ये हताशा भरी खीझ, बेतुकी और हास्यास्पद हरकतों के अलावा और क्या कुछ कही जा सकती है?

 

        स्मरणीय है कि कोई भी सर्कस अपने आप में एक संपूर्ण मनोरंजन स्वीकार किया गया है, फिर भी कंपनी मैनेजर दर्शकों के अतिरिक्त उत्तेजनापूर्ण मनोरंजन हेतु दो-चार आड़े-तिरछे मसखरों का इस्तेमाल करते हैं। (जोकर के अलावा)

 

           नोबेल पुरस्कारों के साथ विवादों का जुड़ाव होता रहा है, लेकिन तब तथ्य और तर्क प्रस्तुत किये गये हैं। ऐसा नहीं हुआ है कि किसी व्यक्ति विशेष ने खुद ही खुद का प्रशंसा प्रमाण-पत्र भी लिख लिया हो और वह भी धमकीभरे ॳंदाज में। कहीं कुछ ऐसा तो नहीं है कि ट्रम्प महोदय नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में कोई मसख़री कर रहे हैं?

 

 

  • Related Posts

    विश्व कविता  अडिंक्रा

    Spread the love

    Spread the love  विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ (पूर्व मुख्य अभियंता) (लंदन प्रवास पर)                 (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)     विश्व कविता    अडिंक्रा  …

    संकल्प और सेवाभाव के साथ राष्ट्र निर्माण में संलग्न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

    Spread the love

    Spread the love    गोविन्द सिंह राजपूत (लेखक मप्र सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री हैं।)                       …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    विश्व कविता  अडिंक्रा

    • By User
    • October 12, 2026
    • 4 views
    विश्व कविता      अडिंक्रा

    चुनाव व्यवस्था में व्यापक बदलाव के बिना लोकतंत्र का भविष्य अंधकारमय पीसी तिवारी।

    • By User
    • October 12, 2026
    • 11 views
    चुनाव व्यवस्था में व्यापक बदलाव के बिना लोकतंत्र का भविष्य अंधकारमय पीसी तिवारी।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत लमगड़ा में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में 516 लोगों ने किया प्रतिभाग।

    • By User
    • October 12, 2026
    • 9 views
    सेवा संकल्प अभियान के तहत लमगड़ा में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में 516 लोगों ने किया प्रतिभाग।

    संकल्प और सेवाभाव के साथ राष्ट्र निर्माण में संलग्न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

    • By User
    • October 12, 2026
    • 11 views
    संकल्प और सेवाभाव के साथ राष्ट्र निर्माण में संलग्न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

    शब्द, भाव और विचार

    • By User
    • October 12, 2026
    • 8 views
    शब्द, भाव और विचार

    अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर विक्टर मोहन जोशी राजकीय इंटर कालेज एन टी डी में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    • By User
    • October 12, 2026
    • 11 views
    अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर विक्टर मोहन जोशी राजकीय इंटर कालेज एन टी डी में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।