दार्शनिक सूर्य जी
लेखक संस्कृति के संरक्षक, समरसता के प्रतीक, आध्यात्मिक चिंतक, महनीय साहित्यकार, मानवतावादी एवं समाज-सुधारक हैं।
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
सकारात्मकता का दर्शन
(कविता)
क्रोध में भी हो,
तो तमीज मत छोड़ना।
प्रतिदिन
थोड़ा बेहतर,
थोड़ा सा हल्का होते जाना।
सरल बने रहना,
सादगी को गले लगाना।
ज़्यादा सोच कर
खुशी को खुद से
दूर मत करना।
बस
अविरल!
पल-पल, प्रतिपल
सकारात्मक रहना।







