30 मई अंतर्राष्ट्रीय आलू दिवस पर विशेष

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ब्यूरो: सुनील चिंचोलकर, (नया अध्याय) बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ।

30 मई अंतर्राष्ट्रीय आलू दिवस पर विशेष

जिंदगी… आलू आलू !

आलू …क्या गोलमाल है
हर कसौटी पर बेमिसाल है
जिंदगी आलू आलू चहुंओर…
जड़ नहीं आलू…तना कमाल है!
बटाटा बड़ा हो या हो समोसा
बिन आलू…. सब कंगाल है!

तीस मई आलू के नाम से जाना जाता है.. इस दिन विश्व अन्तर्राष्ट्रीय आलू दिवस मनाता है…।
👉आलू से जुड़े रोचक तथ्य
🥔जड़ नहीं तना है
आलू जमीन के भीतर रहता है और जड़ होने का मुगालता देता है, पर वास्तव में यह तना है। जैन सम्प्रदाय में जमींदोज खाद्यपदार्थ जीव हिंसा के चलते भोजन में वर्जित हैं। पर आलू के स्वाद का विकल्प उन्होंनें कच्चे केले से पा लिया है। कभी खाकर देखें कच्चे केले से बने समोसे, परांठे, सब्जी, हलवा आदि। आलू के जायके का ही लुत्फ आएगा!

🥔मंदिरों में आलू सब्ज़ी का भोग नहीं लगाने के पीछे भी धार्मिक मान्यता है।

🥔8,000 साल पहले दक्षिण अमरीका के एंडीज में आलू की खेती शुरू की गई थी !

🥔16 वी शताब्दी तक किसी भी शाही किताब में आलू का ज़िक्र नहीं था ! निमतनामा जो खिलजी साम्रज्य के वक़्त बावर्चीखाने पर लिखी गई, उसमें आठ तरह के समोसों का जिक्र है, पर एक में भी आलू नहीं भरा पाया गया! जब निमतनामा लिखी गयी तब मालवा में सश खिलजी शासन था। इस किताब में उस वक़्त के खान पान का विस्तृत वर्णन है !

🥔आलू को पुर्तगाली हिन्दुस्तान लेकर आए और इसकी खेती पश्चिम भारत में करना शुरू की !

🥔हिन्दुस्तान में आलू यूरोप के व्यापारी लेकर आए !
🥔 कहा यह भी जाता है कि भारत में आलू का आगमन जहांगीर के समय में हुआ।
भारत में आलू को बढ़ावा देने का श्रेय वारेन हिस्टिंग्स को भी जाता है, जो 1772 से 1785 तक यहां रहे !

🥔ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान आलू को आमजन में लोकप्रिय करने के लिए जमकर प्रयास हुए !

🥔आलू के भारत आने का किस्सा कुछ भी रहा हो, पर वह यहां की संस्कृति और खान पान में ऐसा रचा बसा जैसे वह यहीं की पैदाइश हो।
🥔पुर्तगाली आलू को बटाटा बोलते थे ! मुंबई, महाराष्ट्र में आज भी बटाटा चलन में है ! यानी बटाटा बटाटा है आलू कौन !

🥔धरती पर क़रीब चार हजार क़िस्में इस जड़ रूपी नायाब तने की उपलब्ध हैं !

🥔विश्व में सर्वाधिक आलू संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा होता है। आलू के उत्पादन में अमेरिका और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है।पहली खेती भी नैनीताल में ही की गई थी !

🥔पोटैटो को जब यूरोपीय व्यापारी ने कोलकाता में बेचना शुरू किया, तो नाम में बदलाव आ गयाऔर इसे आलू कहा जाने लगा !
🥔आलू की खेती की शुरुआत नैनीताल से भी हुई। ! यह अंग्रेजों की देन थी। धीरे-धीरे आलू लोकप्रिय से लोकप्रिय होता गया ! आज आलू के अनगिनत व्यंजन उपलब्ध हैं। स्वादिष्ट खाना बिना आलू मुश्किल लगता है !

🥔आलू भारत में सब्जियों का राजा है ! बारह महीने सदाबहार आलू भारतीय खाने में अपनी धाक
जमा चुका है ! समोसा हो, चाहे आलू का पंराठा , यूपी का आलू झोल बेड़ई पूरी हो या बिहार, पूर्वांचल में बनने वाला आलू-जीरा…चिप्स, वेफर्स…सब लाजवाब !

🥔उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक आलू की जबरदस्त मांग है शायद ही कोई घर हो, जहां आलू का इस्तेमाल ना होता हो… हर सब्ज़ी के साथ यह लुत्फ देता है!

🥔आलू की मोहब्बत इसके चहेतों में हैरान करने वाली है। आलू से उनका लगाव और अपनापन जीवन में ऐसे घुला मिला है कि उन्हें यह बात चौंकाती हैं कि आलू हमारा नही है, बाहर से आया है ! यानी आलू उसीका हो गया, जिसके मुंह लग गया।

🥔डब्ल्यूपीसी(वर्ड पोटैटो कांग्रेस) के अनुसार पहला अंतर्राष्ट्रीय आलू दिवस 30 मई 2024 को मनाया जाएगा। एडिलेड आस्ट्रेलिया में इसे लेकर विशेष तैयारी है।
साधना सोलंकी, वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, राजस्थान।

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