कैप्टन अंशुमान सिंह, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत)

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हरी राम यादव, अयोध्या, उत्तर प्रदेश

वीरगति दिवस पर विशेष

कैप्टन अंशुमान सिंह, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत)

नाम, नमक और निशान तीन ऐसे शब्द हैं जिनके लिए एक सैनिक जीवन पर्यन्त प्रतिबद्ध रहता है । इन तीनों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण ही एक सैनिक आम लोगों से अलग दिखता हैं। एक सैनिक के अन्दर “देश हित सर्वोपरि” की भावना हिलोरें मारती रहती है। उसे देश हित के सामने सब कुछ बौना नजर आता है । वह अपने राष्ट्र और समाज को अपना परिवार मानता है। वह कभी भी अपने राष्ट्र, समाज और साथियों को संकट में नहीं देख सकता। इनके लिए वह मौत से भी टक्कर लेने के लिए तैयार रहता है। आज एक ऐसे ही वीर का वीरगति दिवस है जिन्होंने अपनी अंतिम सांसों तक अपने फर्ज को पूरा करने का प्रयत्न किया।

19 जुलाई 2023 की रात में चंदन ड्रॉपिंग जोन में सेना के फाइबर ग्लास हट में आग लग गई और यह आग तेजी से चल रही हवा के कारण जल्दी ही विकराल हो गयी। कैप्टेन अंशुमान सिंह ने आग लगने की आवाज सुनी और अपने फाइबर ग्लास हट से बाहर निकल पड़े उन्होंने देखा कि बगल के फाइबर ग्लास हट में आग फैल चुकी है, पूरा हट धुएं से भर गया था। अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना वे उस फाइबर ग्लास हट में घुस गए और वहाँ से 4-5 जवानों को बाहर निकाला। इसी बीच उनकी निगाह उस फाइबर ग्लास हट की तरफ गयी जहाँ पर चिकित्सा उपकरण और जीवन रक्षक दवाएं रखी हुए थीं। धुएं और आग की तेज लपटों के बीच उस फाइबर ग्लास हट के अंदर जाकर जीवन रक्षक दवाइयों एवं उपकरणों को बचाना मुश्किल था लेकिन कैप्टेन अंशुमान सिंह ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर अपने फाइबर ग्लास हट के अंदर घुस गए। तेज हवा के कारण बिकराल हुई आग की लपटों ने कैप्टेन अंशुमान सिंह को अपनी गिरफ्त में ले लिया। अथक प्रयासों के बाद भी मां भारती का यह अमर सपूत उस फाइबर ग्लास हट से बाहर नहीं आ पाया और अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

कैप्टन अंशुमान सिंह ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना अपनी यूनिट के जवानों और जीवन रक्षक उपकरणों तथा दवाओं को बचाने के लिए असाधारण बहादुरी और उच्चतम क्रम के संकल्प का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी आखिरी सांस तक अपने कर्तव्यों को पूरा करने का प्रयास किया। उनकी विशिष्ट वीरता और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत शांति काल के दूसरे सबसे बड़े सम्मान “कीर्ति चक्र” से सम्मानित किया गया। 05 जुलाई 2024 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू ने यह सम्मान उनकी माता श्रीमती मंजू देवी और उनकी पत्नी श्रीमती स्मृति सिंह को प्रदान किया।कैप्टेन अंशुमान सिंह का जन्म 16 अक्टूबर 1996 को जनपद देवरिया के गाँव बरडीहा दलपत के एक सैनिक परिवार में श्रीमती मंजू देवी और सूबेदार रवि प्रताप सिंह के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित चैल मिलिट्री स्कूल और सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC) पुणे से पूरी की। एमबीबीएस की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगरा में एक साल की इंटर्नशिप पूरी की। इसके पश्चात भारतीय सेना की मेडिकल कोर में 19 मार्च 2020 को कमीशन मिला। जुलाई 2023 में, कैप्टन अंशुमान सिंह सियाचिन ग्लेशियर में तैनात 26 मद्रास रेजिमेंट से अटैचमेंट पर 26 पंजाब बटालियन के 403 फील्ड अस्पताल में सेवारत थे।

कैप्‍टन अंशुमान सिंह का परिवार लखनऊ के पारा मोहान रोड पर रहता है। इनके परिवार में इनके माता, पिता और पत्नी के अलावा इनसे छोटा एक भाई और एक बहन हैं। कैप्टन अंशुमान सिंह की वीरता और बलिदान को याद रखने के लिए लखनऊ के उनके घर के पास के स्थान का नाम शहीद कैप्टेन अंशुमान सिंह नगर रखा गया है। आपको बताते चलें कि सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊँचा और दुरूह रणक्षेत्र है। यहाँ पूरे साल बर्फ और सर्दी के सितम का बोलबाला रहता है । गर्मी के मौसम में यहाँ का औसत तापमान -50 °C (-58 °F) रहता है । यदि आप मुंह से थूकते हैं तो वह जमीन पर गिरने से पहले बर्फ में परिवर्तित हो जाता है । सियाचिन ग्लेशियर काराकोरम की पांच बड़े हिमानियों में सबसे बड़ा और ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है। समुद्रतल से इसकी ऊँचाई लगभग 5,753 मीटर है।

 

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