मेरे जन्मदिन की सुनहरी यादें

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सौजन्यः सुनील चिंचोलकर

लेखक – त्रिविद शर्मा

कक्षा – तीसरी

स्कूल – बाल भारती पब्लिक स्कूल,

सीपत  (बिलासपुर)

 

               (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

 

                 मेरे जन्मदिन की सुनहरी यादें

 

मेरा नाम त्रिविद शर्मा है और मैं कक्षा तीसरी का छात्र हूँ। मुझे घूमना, नई जगहों को देखना और अपने परिवार के साथ समय बिताना बहुत पसंद है। आज मैं अपने एक ऐसे जन्मदिन के बारे में बताने जा रहा हूँ, जो मेरे लिए बहुत खास और यादगार बन गया।

 

पुरी, ओडिशा का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। मैं अपना सातवाँ जन्मदिन मनाने पुरी गया था। वहाँ मुझे समुद्र देखने और जगन्नाथ मंदिर जाने की बहुत इच्छा थी। मेरे साथ मेरी दादी, पापा, माँ और छोटी बहन भी थे। वहाँ जाने वाले दिन मैं बहुत खुश था। रात में हम लोग ट्रेन से बिलासपुर से चले और सुबह पुरी पहुँच गए।होटल पहुँचकर हमने अपना सामान रखा और तैयार होकर जगन्नाथ मंदिर गए। मंदिर में बहुत भीड़ थी। हम लोग लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे। थोड़ी देर बाद हम मंदिर के अंदर गए। वहाँ भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के साथ विराजमान थे। हमने भगवान के दर्शन किए, उनका आशीर्वाद लिया और प्रसाद लेकर होटल वापस आ गए।थोड़ी देर आराम करने के बाद हम समुद्र देखने गए। जब मैं समुद्र के पास पहुँचा, तो उसकी ऊँची-ऊँची लहरों और तेज आवाज को देखकर मैं आश्चर्यचकित हो गया। शुरुआत में मुझे बहुत डर लगा, लेकिन जब मैं पापा के साथ किनारे गया, तो समुद्र का पानी मेरे पैरों को छूने लगा। ऐसा लगा जैसे समुद्र मुझसे दोस्ती करना चाहता हो। धीरे-धीरे मेरा डर खत्म हो गया।

 

मैंने अपने परिवार के साथ समुद्र के पानी में खूब मस्ती की। वहाँ बहुत सारे लोग बालू पर बैठे थे। मैंने ऊँट की सवारी भी की। शाम होने पर हम होटल लौट आए।अगले दिन मेरा जन्मदिन था। सुबह उठकर मैंने स्विमिंग पूल में काफी समय बिताया, क्योंकि मुझे तैरना बहुत पसंद है। इसके बाद हम पुरी शहर घूमने निकले। वहाँ बहुत सारी सुंदर चीजें मिल रही थीं। हमने एक सुंदर पटचित्र भी खरीदा।रात में मैंने अपने परिवार के साथ होटल में केक काटकर जन्मदिन मनाया। मैंने अपनी पसंद का स्वादिष्ट भोजन भी खाया। इसके बाद हम अपने कमरे में जाकर सो गए।अगली सुबह हमें वापस बिलासपुर के लिए ट्रेन पकड़नी थी। मेरा यह जन्मदिन बहुत खास और यादगार रहा। मैं इसे हमेशा याद रखूँगा।

 

इस सुखद यात्रा ने मुझे यह सिखाया कि परिवार के साथ बिताए गए खुशी भरे पल जीवन की सबसे सुंदर यादें बन जाते हैं। हमें हमेशा अपने माता-पिता और बड़ों का सम्मान करना चाहिए तथा प्रकृति से प्रेम करना चाहिए। हमारे भारत में अनेक सुंदर और दर्शनीय स्थल हैं, जो हमें अपनी संस्कृति, सुंदरता और परंपराओं से परिचित कराते हैं। नई जगहों की यात्रा करने से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है और हर पल को प्रेम, खुशी और अपनापन के साथ जीने की प्रेरणा मिलती है।

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