सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
नवापारा-राजिम, रायपुर, (छ.ग.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“वर्तमान की पुकार!”
(काव्य)
शब्दों में व्याख्या न हो सकी,
ऐसी एक आवाज़ हूँ,
केवल अर्थ नहीं कोई,
मैं तो एक अनुभूति हूँ।
जीवन की रफ्तार में देखो,
कैसे गुजर गया समय,
यादों की ही आगोश में,
भूल नहीं, तुम्हारी याद हूँ मैं।
जीवन की उलझनों में,
तुम कहीं उलझ न जाना,
हर पल संग जो चलती है,
वही तुम्हारी परछाई हूँ मैं।
कोरी कल्पनाओं में ही,
तुम खोए न रह जाना,
ग़म की अंधियारी रातों में,
पिघलकर कहीं खो न जाना।
यथार्थ के धरातल पर,
हर क्षण तुम्हारी खुशी की,
वास्तविक चाहत लिए,
तुम्हारा जीवित वर्तमान हूँ मैं।







