सुनील कुमार वर्मा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
तय
हमे तय करना होगा कि,
हमे क्या चाहिए?
ठंडी धूप
या
तपती चांदनी!
बर्फिली आग
या
धधकता पानी!
धूल को पहाड़
बनने का इंतजार
या
पहाड़ को धूल
कर देने की क्षमता!
सख्त बयार
या
कोमल पाषाण!
चुभते फूल
या
गुदगुदाते शूल!
भटकते लोग
या
ठहरे हुए लोग!
ठहरी हुई नदी
या
बहता पोखर!
पास के सितारे
या
दूर होती धरातल!
पास आती खामोशियां.
या
दूर होती परछाइयां!
सोचने को बहुत कुछ
या
करने को उससे भी ज्यादा!







