सुल्तान अली गहलोत
(लेखक व शिक्षक)
पूर्व छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय,
अलीगढ़, (उ. प्र.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
वो दीवाना चाहिए : सुल्तान अली गहलोत
जो दिलों में प्यार घोले, वो पैमाना चाहिए,
नफ़रतें जो मिटा सके, वो दीवाना चाहिए।
भटकती फिर रही हैं कब से यह निगाहें,
कदमों को अब तो कोई ठिकाना चाहिए।
ख़ामोश लबों से जो ज़माने से कलाम करे,
आँखों में छुपा हुआ ऐसा अफ़साना चाहिए।
भीख में मिले तख़्त-ओ-ताज से जो बेहतर हो,
मेहनत से बना इक छोटा आशियाना चाहिए।
हर एक मोड़ पर जो साथ निभाए वफ़ा से,
राह-ए-इश्क़ में ऐसा ही इक दीवाना चाहिए।
तूफ़ानों की ज़द में जो कभी झुकने न पाए,
साहिल पे अब कोई पक्का ठिकाना चाहिए।
बदल दे जो ज़माने के पुराने इन रिवाजों को,
बदलाव का अब ऐसा नया ज़माना चाहिए।








