सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
सिद्धपीठ कालीमठ में उमड़ा आस्था का सैलाब।
भक्तिमय हुआ घाटी का वातावरण।
मां काली के दर्शन को पहुंच रहे श्रद्धालु।
यात्रा पड़ावों पर लौटी रौनक।
ऊखीमठः शारदीय नवरात्रों में सिद्धपीठ कालीमठ में मां भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। मां के जयकारों से सिद्धपीठ कालीमठ सहित कालीमठ घाटी का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की मनौती मांग रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से घाटी के यात्रा पड़ावों पर भी रौनक लौट आई है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह है।
शारदीय नवरात्रों में कालीमठ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो रही है। भक्तजन विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां भगवती से लोक कल्याण और विश्व शांति की कामना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धपीठ कालीमठ में मां महाकाली, महा लक्ष्मी , महा सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व है। नवरात्रों के चलते मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और पूरा क्षेत्र देवी भक्ति में सराबोर है।
पण्डित दिनेश चंद्र गौड़ ने बताया कि शारदीय नवरात्र शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि और साधना का विशेष पर्व है। सनातन परंपरा में मां भगवती को आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रों में नौ दिनों तक देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मबल प्रदान करने वाली मानी गई है। सिद्धपीठ कालीमठ में मां की पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ ही लोक कल्याण और विश्व शांति की प्रार्थना भी करते हैं।
वेदपाठी रमेश चंद्र भट्ट ने बताया कि सिद्धपीठ कालीमठ प्राचीन धार्मिक परंपराओं और देवी उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्रों में सिद्धपीठ कालीमठ पहुंचकर मां भगवती की आराधना करना श्रद्धालुओं को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। ऐसे पर्व समाज में श्रद्धा, सद्भाव और धार्मिक चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना, स्वच्छता का ध्यान रखना और प्राचीन परंपराओं का संरक्षण करना सभी श्रद्धालुओं का दायित्व है।
शारदीय नवरात्रों में सिद्धपीठ कालीमठ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण घाटी के प्रमुख यात्रा पड़ावों पर भी चहल-पहल बढ़ गई है। स्थानीय दुकानों, भोजनालयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रौनक दिखाई देने लगी है। कालीमठ घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। मां भगवती के प्रति अटूट आस्था के साथ पहुंच रहे भक्तों से घाटी में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।








