ब्यूरो कुमाऊं: दयानन्द कठैत (अल्मोड़ा)
अल्मोड़ा: अब जीवाणुओं की खैर नहीं, वनस्पति धूप से होगा खात्मा, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा में हुआ शोध, औषधीय वनस्पति से तैयार की धूप व हवन सामग्री।
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि औषधीय वनस्पति से तैयार की गई धूप व हवन सामग्री वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं का करेगी खात्मा। विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं की तीन साल की मेहनत रंग लाई है। शोधार्थियों का कहना है कि उन्होंने औषधीय वनस्पति से जीवाणुओं को खत्म करने वाली हवन सामग्री व धूप तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।
लगभग तीन साल पहले शोधकर्ताओं ने वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने हेतु शोध शुरू किया था, शोधकर्ताओं ने अग्निहोत्र विज्ञान के जरिए लगभग 26प्रकार के औषधीय पौधों की पत्तियों और तनों एकत्र करके इससे धूप तथा हवन सामग्री तैयार की, साथ ही दस हानिकारक जीवाणुओं को विकसित किया। शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में इन जीवाणुओं पर हवन सामग्री व धूप से पहले और इसके प्रयोग के बाद का परीक्षण किया। परिणाम ये हुआ कि हवन सामग्री व धूप के धुंए से लगभग 90 प्रतिशत जीवाणु नष्ट पाए। इससे शोधकर्ताओं में काफी खुशी का माहौल है। शोधकर्ताओं ने अल्मोड़ा और बागेश्वर क्षेत्र से हवन सामग्री के लिए वटवृक्ष, गुलर, देवदार, पीपल, बेल, चंदन, ओक, ढाक, मोरपंखी, खैर गिलोय सहित 18औषधीय पौधों के तने/लकड़ी एकत्र किए तथा इसमें कुश और दूब घास को भी शामिल किया।
वहीं धूप बनाने के लिए केदार की पाती नारियल, जौं, तिल, गेंदे के फूल, गुलाब के फूल आदि शामिल किए। शोधार्थी अर्चना काण्डपाल, मुक्ता मर्तोलिया ने बताया कि धूप की सुगंध जीवाणुओं को खत्म करने के साथ-साथ लोगों को एक ताजगी का एहसास भी कराएगी। (डॉक्टर बलवंत कुमार, शोध निदेशक, माइक्रोबायोलॉजी विभाग सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा)







