बजट का झुनझुना : रोजमर्रा के सामानों और खाद्य पदार्थो को सस्ता करने पर कोई चर्चा नहीं।

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पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

बजट का झुनझुना : रोजमर्रा के सामानों और खाद्य पदार्थो को सस्ता करने पर कोई चर्चा नहीं।

 हेल्थ सेक्टर और रोजमर्रा के सामानों पर राहत नहीं : पंकज सीबी मिश्रा।

दाल, सब्जियाँ, चीनी तेल कों सस्ता करने पर कोई चर्चा नहीं

पेट्रो उत्पादों से टैक्स कम ना होना चिंताजनक

शैक्षिक संस्थानों के ढांचागत सुधार और शिक्षा के लिए बजट में कुछ नहीं

आंध्रप्रदेश और बिहार कों अन्य राज्यों की अपेक्षा अपने पाले में रखना हुआ अहम

                       जौनपुर : रोजगार, मंहगाई, किसानी, मनरेगा, पेट्रोल डीजल के दाम, गैस सिलेंडर के दाम, फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन की गारंटी, इन सब जनसरोकार की बातें क्या आपने आज के बजट में सुनी ?आयकर में छूट का झुनझुना देकर, शिक्षा और स्वास्थ्य तक बजट घटा दिया। फिर भी आप को अमृतकाल वाले बजट का कुछ अमृत मिल रहा है तो जश्न मनाईए क्यूंकि आप ईमानदार टैक्स पेयर है। आज वित्त मंत्री निर्मला एस सीतारमन नें सातवीं बार बजट पेश कर अपना ही पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त किया है और लगता है जैसे ये बजट निर्मला सितारमण, नितीश कुमार और चंद्राबाबू नायडू ने एक साथ बैठकर बनाया है। राजनीतिक विश्लेषक एवं जनपद के पत्रकार पंकज सीबी मिश्रा नें प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कभी भी ऐसे हवाई फायर बजटों में आम जनमानस के लिए कुछ खास नहीं होता। क्या इलेक्ट्रॉनिक समान और मोबाइल फ़ोन खायेगी आम जनता। 26000 करोड़ बिहार के लिए नितीश बाबू को और 16000 करोड़ आंध्रप्रदेश के लिए चंद्राबाबू नायडू को मिले हैं। बाकी इतना देने के बाद आम आदमी के लिए कुछ बचा नहीं । वैसे भी जो सरकार बनवाये उसे सब दें दो और जो वोट देते हैं उन्हें कैसे लूटा जाए , कैसे सताया जाए यह कोई मोदी सरकार पार्ट 1 से पार्ट 3 तक सीखे। बेशक हम कोई अर्थशास्त्री नहीं आम आदमी हैं पर हमने जरूरी चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ते देखा है।इसीलिए बजट ठोककर कहते हैं कि निर्मला सीतारमण का यह बजट बेहद निम्नस्तर का और आत्मघाती है , बेहद निराशाजनक है। शायद अपने मतदाताओं को लूटकर किसी और का घर भरने की आदत वर्तमान सरकार को पड़ गई है जो दिन रात लोगो का जीना हराम करते हैं। जो नागरिक ईमानदारी से टैक्स देते हैं , बाजार चलाते हैं , जीएसटी देते हैं , वोट देते हैं , उन्हें सिर्फ लूटना है , देना कुछ नहीं। 15 लाख से ऊपर आमदनी वाले जो नौकरीपेशा कदम कदम पर साथ देते हैं उन पर टैक्स 30% मतलब तुम कमाओ , हम बांटे , वाहवाही लूटें, नतीजा बजट आते ही बाजार धड़ाम लोग हताश हुए।ये है वसूली गैंग इलेक्टोरल बांड का भाई आज नितीश और नायडू की वसूली में ऐसा फंसा कि पहले से तैयार आम बजट बदला जा रहा है। नितीश बाबू ने वसूली का पूरा खाका तैयार कर लिया है और इसके लिए किसानों के हित हेतु बिहार में बैठक की गयी है। दरभंगा सहित बिहार के पांच शहरों में मैट्रो चलेगी। नितीश कुमार रेलवे में नौकरी भी देंगे। इन सबके लिए पैसा कौन देगा वही अपना भाई और भाई नौकरी भी नहीं देना चाहता। दूसरी तरफ नायडू आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस देना चाहता है और केवल अमरावती को राजधानी बनाने के लिए ही 16 हजार करोड़ रुपए चाहिए और आंध्र प्रदेश पर कर्ज भी बढ़ा हुआ है, नायडू तो वसूली का इतना एक्सपर्ट है कि प्रमोद महाजन ने बताया था कि अटल बिहारी की सरकार में ये जब भी दिल्ली आता था पैसे लेकर जाता था। भारत पर विदेशी कर्ज खुद बहुत बढ़ चुका है जिसके लिए आईएमएफ पहले ही चेतावनी दे चुका है। रजिया अब फंसी है गुंडों में। इस बजट में केंद्रीय बजट 2024-25 में मुद्रा लोन की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ा कर ₹20 लाख किया जाना ऐतिहासिक निर्णय है। इसके माध्यम से देश के गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु/सूक्ष्म उद्यम और अधिक सशक्त होंगे। निश्चित तौर पर इन क्षेत्रों के मजबूत होने से देश की आर्थिकी सशक्त होगी। यह निर्णय प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कैंसर दवाइयां शुल्क मुक्त, मोबाइल सस्ता, 3 लाख तक आयकर मुक्त, निर्मला सीतारमण के बजट की बड़ी बात यह कि केंद्रीय बजट 2024-25 के तहत युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया गया है। निश्चित तौर पर इनके माध्यम से रोजगार के नवीन अवसर प्राप्त होंगे और विकसित भारत की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। केंद्रीय बजट 2024-25 में शहरों के सुनियोजित विकास हेतु 30 लाख से अधिक आबादी वाले 14 बड़े शहरों में आवागमन संबंधी विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं। 1 करोड़ शहरी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को पीएम आवास योजना के तहत और शहरी 2.0 के तहत कवर किया जाएगा।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को बजट 2024-25 पेश की इस बार कृषि विकास के लिए बजट बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रहीं थी । एग्रीकल्चर एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार इस बार कृषि और इससे जुड़े कार्यों के लिए 1.50 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया जाना था क्योंकि, सरकार का कृषि विकास पर जोर है। पिछली बार कृषि और इससे जुड़े कार्यों के लिए 1.47 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। इसके अलावा ग्रामीण विकास के लिए भी सरकार बजट में इजाफा कर 2.70 लाख करोड़ रुपये करने की चर्चा थी। पिछली बार यानी अंतरिम बजट में इसके लिए वित्त मंत्री ने 2.66 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया था। सातवीं बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में पेश कर रही बजट वित्त मंत्री निर्मा सीतारमण का बजट भाषण, कहा- “नेचुरल फॉर्मिंग से अगले एक साल में एक करोड़ किसान जुड़ेंगे, बजट में पहले ऐलान की जा चुकी कुछ योजनाओं को भी शामिल किया है, खेती में रिसर्च को ट्रांसफॉर्म करना, एक्सपर्ट की निगरानी, जलवायु के मुताबिक नई वैरायटी को बढ़ावा देंगे, नेचुरल फॉर्मिंग से अगले एक साल में एक करोड़ किसान जुड़ेंगे, दाल और दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए प्रोडक्शन, स्टोरेज और मार्केटिंग पर फोकस करेंगे, सरकार का फोकस सरसों, मूंगफली, सनफ्लॉवर और सोयाबीन जैसी फसलों पर होगा।

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