डॉ. सत्यवान सौरभ, भिवानी, हरियाणा।
ध्वज लिपटकर वीर।।
हुई लहू के मोल पर, मातृभूमि आजाद।
होने ना देंगे कभी, हम इसको बर्बाद।।
लिए तिरंगा मर मिटे, भारत-माँ के लाल।
धन्य-धन्य वो मात है, जिसने जन्मे लाल।।
सही सलामत देश ही, है मेरा अभिमान।
मिलजुलकर रक्षा करें, रखें हथेली जान।।
शान्ति भंग कर लोग फिर, करते खडे़ सवाल।
प्रेम, अहिंसा,शांति से, उत्तर सभी निकाल।।
आजादी के जश्न पर, भारी मन की पीर।
आयेंगे कितने अभी, ध्वज लिपटकर वीर।।
जय हो हिंदुस्तान की, विनती है भगवान।
राष्ट्रभक्त के रूप में, गाएंँ बस गुणगान।।
सभी धरे संकल्प यह, हर जन पहरेदार।
तभी मनेगा देश में, आजादी का त्यौहार।।
आज जरूरत है यही, रहे सदा वो ध्यान।
आजादी की चाह में, दे दी जिन ने जान।।








