मंजूषा राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)
(नया अध्याय, देहरादून)
लाइब्रेरी मेरे सपनों की
मेरे सपनों की लाइब्रेरी में,
ढ़ेरों किताबें है सजी।
जिन किताबों में,
मेरी ख्वाहिशें है लिखी।
कभी फुर्सत जो मिले,
उन्हें पढ़कर देख लेना।
कितने ख्वाब है,
इन आँखों में सजे।
उनका अंदाजा,
पन्नों की गिनती कर कर लगा लेना।
कुछ ख्वाब होंगे बचपन के,
उन पर चढ़ी धूल हटा लेना।
कुछ होंगे धुंधले-धुंधले,
उनके लिए उजाले का सहारा लेना।
कुछ ख्वाब है अपनों से जुड़े।
और कुछ मैंने खुद के लिए है बुने।
लेकिन उन्हें पढ़कर,
मुझे स्वार्थी न समझ लेना।
कभी फुर्सत जो मिले,
उन्हें पढ़कर देख लेना।
मेरे सपनों की लाइब्रेरी में,
ढ़ेरों किताबें है सजी।।







