सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री एवं लेखिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा (राजिम)
रायपुर (छ.ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
घबराओ मत !
(कविता)
——————————————————–
मत इतराओ शोहरत पर, न घमंड कभी तुम लाओ,
जीवन अनमोल है अपना, न हंसी-मजाक उड़ाओ।
अति हर बात की बुरी है, संयम का दामन थामो,
हद से ज्यादा उम्मीदें, न किसी से तुम लगाओ।
जीवन एक सफर है प्यारा, चलने से मत घबराओ,
दुःख का रोना रोकर, न मन को घर निराशा का बनाओ।
सहज रहो तुम सदा, व्यर्थ में न ज्यादा दिमाग लगाओ,
मुसीबतें लांघ जाओ सब, खुद को कमजोर न बनाओ।
आगे रहो न पीछे, बस दिल की राह पर चलो,
काबलियत अपनी पहचानो, न दिखावे में उम्र ढलो।
सच का सामना करो सदा, स्वप्निल दुनिया से बाहर आओ,
कौन-कैसा है, क्यों है, व्यर्थ इसमें न समय गंवाओ।
जो आज का पल है प्यारा, उसे खुशियों से जी लो,
विश्वास नहीं किसी का, न भावनाओं में बह जाओ।
सामर्थ्य जितना है तुममें, कर्मवीर तुम कहलाओ,
दूसरों की खातिर, न खुद को तुम भुलाओ।
वक्त की रफ़्तार तेज है, न आंसू व्यर्थ बहाओ,
कठोर बनो, सोचो कम, निर्णय की क्षमता बढ़ाओ।
न डरना, न सहमना, न कद्रदानों को समझाओ,
जैसा भी है सफर, चलते रहो, न पीछे मुड़कर देखो।
समय बहुत कीमती है, न व्यर्थ इसे तुम गंवाओ,
काम जो है आज का, कल पर न टाल जाओ।
हर मुश्किल आसान होगी, बस विश्वास अपना बनाए रखो,
तूफानों में भी दीपक बन, हिम्मत कभी न हार जाओ।







