डाॅ. उषा झा ‘रेणु’
देहरादून
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
एक ताजी गजल आप सभी को नज्र कर रही 🌹
तमाम कर्ज सभी के उतार आए हम
मशक्कतों से ही किस्मत सँवार आए हम
ग़मो से ज़ीस्त में हो सामना न अब मेरा
तभी तो द्वार पे रब को पुकार आए हम
क़दम जहाँ भी पड़े बस खुशी क़दम चूमें
सजा के आँख में सपने हज़ार आए हम
मिली नज़र थी किसी अजनबी से महफ़िल में
उसी पे दिल उसी पल ही हार आए हम
भरे दिलों में हमारे थे यूँ गिले शिकवे
दिलों के जोड़ के फिर से तार आए हम
भरी बड़ी थी उदासी हरेक लम्हों में
निकल के खार से लेके बहार आए हम
घिरी थी मौजों में कश्ती उषा हमारी जो
दुआएं करते हुए लेके पार आए हम







