सुधा गोयल
कृष्णानगर, डा. दत्ता लेन
बुलंदशहर
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
बचपन
बचपन ने बेचा है बचपन
फुट पाथों पर
बेचे फूलों के गुलदस्ते
फुटपाथों पर
फूलों ने फूलों को बेचा
फुटपाथों पर
लिए हाथ में आशा के दीपक
दीपक बनकर
एक निवाले की खातिर
बिकता है फुटपाथों पर
और नहीं है सपना कोई
बस मुट्ठी भर दाने पर
हाथों में तितली गुब्बारे
फुटपाथों पर
आजादी का लिए तिरंगा
बेच रहे फुटपाथों पर
आशाओं के झटके खाकर
जीवन के पैबंदों पर
बचपन के दस्तखत है
नंगे पांवों पर।







