गुस्सा ( कहानी)

Spread the love

 

राजेंद्र रंजन गायकवाड 

(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)

     छत्तीसगढ़

           

                  (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

गुस्सा ( कहानी)

 

 

राहुल शहर के सबसे समझदार और सफल लोगों में गिना जाता था। मात्र 36 साल की उम्र में उसने दो बड़ी कंपनियां खड़ी कर ली थीं। लोग उससे सलाह लेने आते थे। “राहुल भाई, आप तो कभी गलती नहीं करते,” वे कहते थे। राहुल मुस्कुराकर जवाब देता, “गलती हर कोई करता है, बस समय पर उसे पहचान लेना चाहिए।” लेकिन समय कभी-कभी बहुत क्रूर हो जाता है। उस समय अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। राहुल की पत्नी प्रिया उसके साथ 12 साल से थी। प्रिया शांत स्वभाव की, समझदार और बेहद प्यार करने वाली पत्नी थी। राहुल का स्वभाव थोड़ा तीखा था लेकिन प्रिया हमेशा उसे संभाल लेती। दोनों की एक बेटी थी अनन्या जो उस समय दस साल की थी। एक शाम घर में भावावेश का तूफान आ गया।

 

राहुल ऑफिस से थका-हारा घर आया था। एक बड़ा डील फेल हो गई थी । प्रिया ने पूछा, “आज ऑफिस कैसा रहा?” राहुल ने चिढ़कर जवाब दिया, “ठीक नहीं रहा।” प्रिया ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा, “कोई बात नहीं, कल फिर कोशिश करो, घर तो है ना..सब ठीक हो जाएगा।

 

बात छोटी-सी थी लेकिन राहुल का दिमाग पहले से ही उबल रहा था। उसने गुस्से में कहा, “तुम्हें क्या पता! तुम तो बस घर बैठी आराम करती हो, बाहर की दुनिया की परेशानी क्या जानोगी?” कभी जॉब किया है ?

 

प्रिया चुप रह गई लेकिन राहुल का गुस्सा रुका नहीं उसने वो शब्द कह दिए जो कभी नहीं कहने चाहिए थे। “शायद तुमसे शादी करके मैंने सबसे बड़ी गलती कर दी।”
प्रिया का चेहरा सफेद पड़ गया उसने कुछ नहीं कहा बस चुपचाप रसोई में चली गई।

 

रात को राहुल को अपनी गलती का एहसास हुआ, वह प्रिया के पास गया, माफी मांगनी चाही, लेकिन उसका अहंकार / गुस्सा अभी भी उबल रहा था उसने सोचा “कल सुबह मना लूंगा।” अभी बात बढ़ जाएगी।
लेकिन सुबह कुछ और ही हुआ ,
प्रिया ने चिट्ठी छोड़ दी थी “राहुल, तुमने जो कहा, वो शायद गुस्से में कहा होगा लेकिन शब्द वापस नहीं आते। मैं कुछ दिनों के लिए मायके जा रही हूँ। अनन्या को स्कूल रेगुलर भेजते रहना। जब तुम्हारा गुस्सा ठंडा हो जाए और तुम सच में मुझसे बात करना चाहो, तो बता देना मैं वापस आ जाऊंगी। राहुल ने सोचा, प्रिया कुछ दिनों में वापस आ जाएगी,लेकिन प्रिया नहीं आई पहले हफ्ता, फिर महीना, फिर साल बीत गए।

राहुल ने बहुत कोशिश की फोन किए, मायके गया, माफी मांगी, रोया भी लेकिन प्रिया हर बार एक ही बात कहती “राहुल, तुमने मुझे नहीं, अपनी बेटी की माँ को अपमानित किया था मुझे समय लगेगा।” समय बीतता गया।
अनन्या बड़ी हो गई। उसने पिता से दूर रहना शुरू कर दिया, कहती, “पापा, आपने मम्मी को ऐसा क्यों बोला ? बेटी को माँ से दूर रख कर दुख दिया है?” राहुल के पास कोई जवाब नहीं होता, बस अनमना सा सॉरी बेटा ! बोलकर दूसरे कमरे में चला गया।

आज राहुल 50 साल का है। उसकी कंपनियां और भी बड़ी हो गई हैं, बैंक बैलेंस भरा हुआ है। लेकिन घर सूना है, शाम को वह बालकनी में बैठकर उसी चिट्ठी को बार-बार पढ़ता है, जो प्रिया ने छोड़ी थी। कभी-कभी वह खुद से पूछता है “मैं इतना समझदार होने के बावजूद उस एक पल में इतना नासमझ कैसे हो गया?” अपने गुस्से पर काबू क्यों नहीं किया? हां, प्रिया को मनाया लेने भी गया पर वो मेरे साथ क्यों नहीं आई ?

भावावेश में लिया गया एक फैसला, एक गुस्से का एक वाक्य, और पूरी जिन्दगी का पछतावा, राहुल आज भी प्रिया को वापस लाने की कोशिश करता है। लेकिन समय ने उसे सबक सिखा दिया है । सबसे खतरनाक चीज दुनिया में गुस्सा और अहंकार है, क्योंकि ये वो हथियार हैं जो हम पर खुद पर ही चल जाते हैं। जब तक हमें एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। समय का सवाल हमेशा यही रहता है , क्या तुम उस पल में इतने बड़े हो जाओगे, जितना बड़ा तुम सोचते हो कि हो? या किसी को नीचा दिखा कर सारी ज़िन्दगी ख़ुशी से जी सकते हो? शायद नहीं इसलिए अपने शब्द और गुस्से को सदा संतुलित रखने की माहिती जरूरत है।

  • Related Posts

    मानौरा: जहां पुरी से वचन निभाने आते हैं भगवान जगदीश

    Spread the love

    Spread the love    अंजनी सक्सेना                      (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)       मानौरा: जहां पुरी से वचन निभाने आते हैं…

    सिस्टम समझें,,,                           (लेख) 

    Spread the love

    Spread the love  राजेंद्र रंजन गायकवाड  (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)  बिलासपुर, छत्तीसगढ़                    (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)     सिस्टम समझें,,,  …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    मानौरा: जहां पुरी से वचन निभाने आते हैं भगवान जगदीश

    • By User
    • July 14, 2026
    • 8 views
    मानौरा: जहां पुरी से वचन निभाने आते हैं भगवान जगदीश

    जिला अधिकारी अंशुल सिंह ने बताया कि अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग रानीखेत द्वारा बताया गया क्वारब बाइपास मार्ग आपदा को लेकर बंद किए जाने को लेकर।

    • By User
    • July 14, 2026
    • 13 views
    जिला अधिकारी अंशुल सिंह ने बताया कि अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग रानीखेत द्वारा बताया गया क्वारब बाइपास मार्ग आपदा को लेकर बंद किए जाने को लेकर।

    दोस्ताना माहौल में बच्चों से रूबरू हुई महिला पुलिस, जागरूक करते हुए सड़क सुरक्षा का दिया संदेश।

    • By User
    • July 14, 2026
    • 6 views
    दोस्ताना माहौल में बच्चों से रूबरू हुई महिला पुलिस, जागरूक करते हुए सड़क सुरक्षा का दिया संदेश।

    सिस्टम समझें,,,                           (लेख) 

    • By User
    • July 14, 2026
    • 11 views
    सिस्टम समझें,,,                            (लेख) 

    “जीवंत इंसानियत”         (कविता)

    • By User
    • July 14, 2026
    • 15 views
    “जीवंत इंसानियत”          (कविता)

    साहित्य की जीवंत परंपरा का उत्सव निखिल बंग साहित्य सम्मेलन।

    • By User
    • July 14, 2026
    • 12 views
    साहित्य की जीवंत परंपरा का उत्सव निखिल बंग साहित्य सम्मेलन।