सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
नवापारा-राजिम, रायपुर, (छ.ग.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“सबल!” ( कविता )
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खुशी के
हसीन ख्वाब सजाना सीखो,
हर तूफ़ां से लड़कर बुलंदी तक
जाना सीखो।
क्या पता किस मोड़ पर ढल
जाये जिंदगी की शाम,
उससे पहले जिंदगी में लक्ष्य की
जड़ तक जाना सीखो।
उलझ कर काँटों से भी
जिंदगी में प्यार की महक
लाना सीखो,
वो जिंदगी भी क्या जो
परेशानियों से लड़ न सके।
हर चुनौती के लिए खुद को
सबल बनाना सीखो,
न इस जमीं पे, न उस आसमां में
है कोई शख्स जो वक्त से बढ़कर हो।
वक्त की कीमत को पहचानना
सीखो,
खुशी के
हसीन ख्वाब सजाना सीखो।







