चन्द्रमती चतुर्वेदी
बस्ती, अयोध्या धाम
उत्तर प्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
तेरी परवाह मेरी आदत बन चुकी है
तेरी परवाह मेरी आदत बन चुकी है,
मेरे जीवन की यही दौलत बन चुकी है।
तेरे चेहरे की हँसी मेरी कमाई,
मेरी हर साँस तेरी राहत बन चुकी है।
जब कभी आँखों में तेरे अश्रु आए,
मेरी पलकों की दुआ छत बन चुकी है।
दर्द तेरे बाँट लेना ही खुशी है,
मेरी चाहत तेरी ताकत बन चुकी है।
तू सलामत हो, यही अरदास मेरी,
हर सुबह बस तेरी इबादत बन चुकी है।
दूरियों से प्रेम कब कम हो सका है,
रूह की खुशबू मोहब्बत बन चुकी है।
नाम तेरा ही धड़कनों में गूँजता है,
दिल की धुन तेरी विरासत बन चुकी है।
रात भर तारों से तेरा हाल पूछूँ,
चाँद से मेरी शिकायत बन चुकी है।
तू हँसे तो फूल भी मुस्का उठें सब,
तेरी हँसी मेरी जरूरत बन चुकी है।
रब से बढ़कर कुछ नहीं माँगा कभी भी,
बस तेरी खुशियाँ मेरी जन्नत बन चुकी हैं।
अब न कहना साथ मेरा छोड़ देना,
जिंदगी तेरी ही अमानत बन चुकी है।
‘चन्द्रमती’ कह रही है आज दिल से,
तेरी परवाह मेरी आदत बन चुकी है।







