मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
कारगिल के अमर शहीदों को समर्पित
जय हिंद जय भारत
है गर्व मुझको उन पर
है गर्व मुझे उन माँओं पर,
जिन्होंने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया।
अपने जिगर के टुकड़े को,
वतन की खातिर खुद से दूर किया।।
है गर्व मुझे उन पत्नियों पर,
जो हर पल उनकी हिम्मत बनती आई।
देश के लिए अपने पति को शहीद होते देखकर,
हरदम दिल पर पत्थर रखती आई।।
है गर्व मुझे उन उदार बहनों पर,
जो देश की खातिर अपनी राखी कुर्बान करती आई।
न जाने इतनी हिम्मत कहाँ से है उन्होंने जुटाई।
जब जब यह सोचा आँख भर आई।।
कैसे कोई ऋण चुकाए उस पिता का,
जिसने अपना इकलौता सपूत,
है इस धरती माँ को समर्पित किया।
जिससे उसका बुढ़ापे का सहारा ही छीन गया।
फिर भी खुद को न मायूस होने दिया।।
है गर्व मुझे उन वीर सपूतों पर,
जो सब कुछ पीछे छोड़कर,
अपना जीवन देश के नाम न्यौछावर करते आए।
तन से सांसों का बंधन छूटने तक।
भारत माँ की जय जयकार करते करते चले गए।।
है गर्व मुझे उन पर।
रहोगे सदा तुम अमर हे वीर सपूतों,
मातृ भूमि तुम्हें वंदन करती है।
मंजू अपनी लेखनी के माध्यम से,
श्रद्धासुमन तुम्हें अर्पण करती है।।







