
कवयित्री
सरोज कंसारी
नवापारा राजिम
रायपुर (छ.ग.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
सरहद के पहरेदार
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सीमाओं पर तैनात होते सैनिक
लगाकर जान की अपनी बाजी
बंदूक ताने खड़े हैं डरते नही तनिक
बहादुरी को उनके देते आज सलामी।
आँखों में अंगार जज्बा रखते तूफानी
रोक लेते हैं प्रलय की भी हर गति
भारत माँ की हरपल करते रखवाली
दुश्मनों की कर देते पल भर में छुट्टी।
आतंकी देशद्रोही को कर देते है ढेरी
बाहरी आक्रमण से रक्षा करते सबकी
तभी कहलाते देश के बहादुर फौजी
कभी नहीं मिट सकती जिनकी हस्ती।
मौत के साये में जिंदगी उनकी पलती
परिवार से अपने बनाकर रखते दूरी
हिला नही सकती उन्हें कोई मजबूरी
देशप्रेम का भाव होती हैं जिंदगानी।
नही करते परवाह चाहे हो गर्मी सर्दी
मुश्किलों से लड़ते हैं जांबाज सैनिक
याद रखेगी दुनिया उनकी ये कुर्बानी
मजबूत, निडर और होते है साहसी।
बखूबी निभाते हैं अपनी जिम्मेदारी
लहू के कतरे से करते तिलक माटी की
शौर्य को नमन करती हिन्द की भूमि
आन बान शान हैं मेरे देश के सैनिक।।
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