राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
मैनपाट, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
संतुष्टि
(कहानी)
रामपुर गाँव में रामसेवक नाम का एक किसान रहता था। उसके पास थोड़ी-सी जमीन थी एक छोटा-सा घर और दो बच्चे थे। दिन-रात मेहनत करता फिर भी मन में हमेशा एक खालीपन बना रहता। पड़ोसी की नई मोटर साइकिल, ट्रैक्टर देखकर जलन होती, शहर के रिश्तेदारों की बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, घर देखकर मन उदास हो जाता। रात को नींद नहीं आती, शरीर कमज़ोर पड़ता और घर में छोटी छोटी बातों पर झगड़े होते रहते थे।
एक दिन गाँव में एक बौद्ध भिक्षु उसके घर पधारे। रामसेवक उनके पास बैठ गया और अपनी तकलीफ बताई। भिक्षु मुस्कुराए और बोले,
“बेटा, संतुष्टि जब जीवन में आ जाती है, तो शान्ति, सुख, स्वास्थ्य और खुशियाँ अपने आप भर जाती हैं। आप निश्चिंत होकर मन लगाकर अपना काम करो। रामसेवक को पूरी बात समझ में नहीं आई। भिक्षु ने आगे कहा, आज से एक हफ्ता सिर्फ यही देखो कि तुम्हारे पास क्या-क्या है? जो नहीं है, उसके बारे में ज्यादा मत सोचो बस कोशिश करते रहो कि कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
रामसेवक ने कोशिश की सुबह उठकर खेत की हरियाली देखी, बच्चों की हँसी सुनी, पत्नी के हाथ का गरम रोटी का स्वाद महसूस किया। शाम को आकाश के रंग देखकर मन शांत हुआ। पड़ोसी भी बोलते भाई आजकल बहुत शांत दिखते हो? वो मुस्करा देता, धीरे-धीरे रामसेवक मन में एक हल्की-सी संतुष्टि आने लगी थी।
कुछ दिनों बाद आश्चर्य की बात हुई। उसके शरीर में नई ताकत आ गई थी। नींद गहरी सोने लगा, घर में झगड़े कम हो गए। बच्चे पहले से ज्यादा खुश दिखने लगे। पड़ोसी फिर उसकी मुस्कान देखकर हैरान हुए, तो रामसेवक ने कहा,
“भाई, हैरान मत हो! मेरे पास पहले भी यही सब था… बस संतुष्टि नहीं थी, फालतू मन बेचैन कर था, अब जब संतुष्टि आ गई, तो शान्ति भी आ गई, सुख भी, स्वास्थ्य भी और खुशियाँ भी मेरे साथ हैं।
साल बीत गए, रामसेवक की ज़मीन थोड़ी बढ़ी, घर भी सुधर गया, सबसे बड़ा बदलाव उसके मन में हुआ था। वह अब कम में भी खुश रहता था। गाँव वाले कहते, “रामसेवक के चेहरे पर हमेशा एक शांति रहती है… जैसे उसके जीवन में कोई दिव्य प्रकाश भर गया हो।
सच में, आज की भौतिकवादी दुनियां में हमारे पास कमाया हुआ बहुत कुछ है, किन्तु दूसरों से तुलना करके हम अक्सर दुःखी रहते हैं। हमें अपनी मानसिक अवस्था बदलना और जागरूक होकर डर, क्रोध और हीन भावना से बचना है। महान कवि ने कहा है ,, कि
गौधन गजधन बाजधन और रतन धन खान।
जब आये संतोष धन, सब धन धूल समान।।







