✍️ रचनाकार : डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान),
(कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
🌿 बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान 🌿
बारिश केवल मौसम नहीं बदलती, वह स्मृतियों के बंद दरवाज़े भी खोल देती है। “बारिश आई गाँव की, भीग उठे अरमान” एक भावपूर्ण दोहा-गीत है, जो गाँव की सोंधी मिट्टी, पगडंडियों, पीपल की छाँव, कागज की नाव और बचपन की अनमोल यादों को जीवंत कर देता है।
इस रचना में बरसात की हर बूँद गाँव की आत्मा, बचपन की निश्छलता और जीवन की सरलता का संदेश लेकर आती है। भीगी मिट्टी की खुशबू, बारिश की फुहारें और यादों का संसार पाठक और श्रोता को अपने गाँव की ओर लौटने का भाव जगाते हैं। यह गीत प्रकृति, स्मृतियों, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संगम है।
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